मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मीरा भयंदर वसई विरार पुलिस कमिश्नरेट ने एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। अनैतिक मानव तस्करी रोकथाम विभाग ने २६ जुलाई को एक एनजीओ की मदद से वसई के नायगांव में वेश्यावृत्ति के धंधे से एक 12 साल की बांग्लादेशी लड़की को बचाया। जैसे ही उसे बचाया गया, उसने अपने साथ हुई घटना का विस्तृत विवरण दिया।


मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस और एक्सोडस रोड इंडिया फाउंडेशन व हार्मनी फाउंडेशन के मानव तस्करी विरोधी दस्ते ने 26 जुलाई को कार्रवाई की। इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है। इस नाबालिग पीड़िता द्वारा एनजीओ को दिए गए बयान में खौफनाक सच्चाई सामने आई है कि महज तीन महीनों में 200 से ज्यादा पुरुषों ने उसका यौन शोषण किया है।


मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार, पीड़िता एक स्कूली छात्रा है। वह एक विषय में फेल हो गई थी, उस समय उसने घर छोड़ दिया था क्योंकि उसे डर था कि उसके माता-पिता उसे पीटेंगे या गुस्सा करेंगे। उसे जानने वाली एक महिला उसे पहले कोलकाता ले आई। वहाँ उसने उसके लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए। फिर उसे गुजरात के नाडियाड लाया गया, जहाँ एक बूढ़े व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार किया, उसकी अश्लील तस्वीरें लीं और फिर उसे वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया।उसे मुंबई लाया गया। उसके बाद, कई जगहों पर उसके साथ बलात्कार किया गया।


इस मासूम बच्ची का बचपन, जो अभी किशोरावस्था में भी नहीं पहुँची थी, वेश्यावृत्ति के दानवों ने छीन लिया। गैर-सरकारी संगठनों और पुलिस द्वारा बचाए जाने के बाद, पीड़िता को उल्हासनगर स्थित बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। वहाँ उसकी काउंसलिंग की जा रही है।
नायगांव पुलिस फिलहाल मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं और सात पुरुष हैं जो दलाल हैं। गैर-सरकारी संगठन ने मांग की है कि इस मामले के सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और कड़ी सजा दी जाए।


