■ जनसुरक्षा कानून के विरोध में कांग्रेस ने पूरे राज्य में आंदोलन कर उसकी होली जलाई।
मुंबई वार्ता संवाददाता

देवेंद्र फडणवीस द्वारा लाया गया “जनसुरक्षा” नामक कानून वास्तव में “लोकतंत्र असुरक्षा कानून” है। महाराष्ट्र के इस “चिप मिनिस्टर” को अब दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री बनने का सपना दिनदहाड़े आने लगा है और इसी उद्देश्य से गोलवलकर की बंच ऑफ थॉट में वर्णित “भारत” बनाने के लिए फडणवीस ने यह सारा षड्यंत्र रचा है, ऐसा तीखा प्रहार महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया।


यशवंतराव चव्हाण सेंटर में जनसुरक्षा कानून विरोधी संघर्ष समिति की ओर से “निर्धार परिषद” आयोजित की गई थी। इस परिषद में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सांसद शरद पवार, शिवसेना पक्ष प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद सुप्रिया सुले, सांसद अनिल देसाई, विधायक विनोद निकोले, अजित नवले, भारत पाटणकर, प्रकाश रेड्डी, उल्का महाजन, भालचंद्र कांगो, उदय भट, कॉ. प्रकाश रेड्डी, राजेंद्र कोरडे आदि उपस्थित थे।


इस अवसर पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि, मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उत्तर भारत से एक “बाबा” आगे हैं और अगर वे आगे निकल गए तो उनकी मुश्किल हो जाएगी, यह देखते हुए “मायबोली” (अपनों) की पीठ में भी खंजर घोंपने का काम फडणवीस ने किया है। सत्ता-लोलुप वृत्ति और बंच ऑफ थॉट की विचारधारा के लिए यह कानून लाया गया है। लेकिन सभी संविधान-प्रेमी लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। वामपंथी और दक्षिणपंथी विवाद लोकतंत्र के लिए ठीक है, परंतु इस समय सबको एक होकर लड़ना चाहिए।
अंग्रेजों ने “जेल, मेल और रेल” सूत्र से राज चलाया था और आज के सत्ताधारी भी वही सूत्र चला रहे हैं।डाक-व्यवस्था से संपर्क रखने का काम इंटरनेट के जमाने में “मेल” हो गया और उसका नियंत्रण इनके हाथ में है। विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब है, लेकिन “व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी” खूब चल रही है। और “जेल” का मतलब — जो सरकार के खिलाफ बोलेगा उसे जेल में डाल दिया जाएगा। सरकार के पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन शक्तिपीठ हाइवे के लिए 88 हज़ार करोड़ रुपये हैं। यह हाइवे एक उद्योगपति के लिए बनाया जा रहा है और मुंबई की जमीन दूसरे उद्योगपति को दी जा रही है।सरकार के पास बुलडोज़र है और वह लोकतंत्र पर भी चला सकती है। इस सरकार के पास कान और आंख तो हैं ही नहीं, पर अक़्ल भी नहीं है। ऐसे सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए संघर्ष की पद्धति भी बदलनी पड़ेगी।
कांग्रेस पार्टी ने जनसुरक्षा कानून का तीव्र विरोध किया है। राज्य के प्रत्येक ज़िले में इस कानून की होली जलाई गई, मशाल यात्रा निकाली गई। आगे भी कांग्रेस पार्टी का इस कानून के प्रति विरोध जारी रहेगा, ऐसा सपकाल ने कहा।राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने इस अवसर पर कहा कि हमने चुनाव अलग-अलग लड़े हों, लेकिन आज राष्ट्रीय आवश्यकता के चलते हम एक हैं। लोकतंत्र के मूल्यों पर संकट आया है, संस्थाओं पर हमला हो रहा है, न्याय-व्यवस्था में भी घुसपैठ हो गई है। एक पार्टी का काम करने वाले व्यक्ति को न्यायाधीश पद पर नियुक्त किया गया है। जनसुरक्षा कानून ने विचार और मौलिक अधिकारों पर हमला किया है। अब इस सरकार को सबक सिखाने की जरूरत है और उसके लिए हम पूरी ताक़त के साथ आपके साथ हैं, ऐसा शरद पवार ने कहा।
पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि वाम-दक्षिण का कोई भेदभाव किए बिना, लोकतंत्र पर आए इस संकट को खत्म करने के लिए सभी एक साथ आए हैं। इस सरकार द्वारा लाए गए इस कानून को रद्द करने के लिए हम तीव्र संघर्ष करेंगे, ऐसा ठाकरे ने कहा।


