■ तेल वर्ष 2024-25 के पहले 9 महीनों में खाद्य तेल के आयात में 9.87% की गिरावट : शंकर ठक्कर।
मुंबई वार्ता संवाददाता

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया कि भारत में पाम तेल का आयात 5 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।भारत सरकार द्वारा विदेशी तेलों के आयात पर काबू करने के अभियान में आंशिक तौर पर सफलता मिलती दिख रही है। भारत ने तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर-अक्टूबर) के नवंबर-जुलाई के दौरान कुल खाद्य तेल आयात में 9.87 प्रतिशत की कमी करने में सफलता मिली है।


आंकड़ों से पता चला है कि भारत ने नवंबर-जुलाई 2024-25 के दौरान 107.56 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जबकि 2023-24 की इसी अवधि में 119.35 लाख टन का आयात किया गया था।


उपरोक्त के अलावा, नेपाल ने साफ्ता समझौते के तहत भारत को शून्य शुल्क पर मुख्य रूप से रिफाइंड सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल तथा थोड़ी मात्रा में आरबीडी पामोलिन और रेपसीड तेल का निर्यात किया। नवंबर-जून 2024-25 (आठ महीने) के दौरान नेपाल से आयात 5.21 लाख टन रहा। तेल वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों में भारत द्वारा कुल खाद्य तेल आयात 112.77 लीटर (नेपाल से 107.56 लीटर + 5.21 लीटर) हुआ था।
इस अवधि के दौरान रिफाइंड तेलों (आरबीडी पामोलिन) के आयात में भारी गिरावट आई है। 31 मई, 2025 से सीपीओ (कच्चा पाम तेल) और आरबीडी पामोलिन के बीच आयात शुल्क अंतर को 8.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 19.25 प्रतिशत करने से रिफाइंड तेल का आयात नुकसानदायक हो गया है।
भारत ने नवंबर-जुलाई 2024-25 के दौरान 9.87 टन आरबीडी पामोलिन का आयात किया, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह 15.18 टन था। भारत ने जुलाई 2025 में 5,000 टन आरबीडी पामोलिन का आयात किया, जबकि जुलाई 2024 में यह 1.36 टन था।
कच्चे खाद्य तेलों में भी गिरावट
भारत ने तेल वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों के दौरान 97.68 लीटर कच्चे खाद्य तेलों का आयात किया (तेल वर्ष 2023-24 के पहले नौ महीनों में यह 104.16 लीटर) था। जबकि सीपीओ और सूरजमुखी तेल के आयात में गिरावट आई है, तेल वर्ष 2024-25 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान कच्चे सोयाबीन तेल (डिगम) में वृद्धि हुई है।
भारत ने तेल वर्ष 2024-25 के नवंबर-जुलाई के दौरान 41.09 लीटर सीपीओ (52.39 लीटर) और 20.92 लीटर सूरजमुखी तेल (28.30 लीटर) का आयात किया है। इस अवधि के दौरान सोयाबीन तेल (डिगाम) का आयात बढ़कर 35.22 लीटर (22.59 लीटर) हो गया है।
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का आयात अधिक होने से तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर-जनवरी) की पहली तिमाही में वनस्पति तेलों का आयात 6 प्रतिशत बढ़ गया।
दूसरी तिमाही (फरवरी-अप्रैल) में आरबीडी पामोलीन और सीपीओ की ऊंची कीमत के कारण वनस्पति तेलों के आयात में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तीसरी तिमाही (मई-जुलाई) में वनस्पति तेलों का आयात बढ़कर 43.15 लाख टन हो गया। हालाँकि, तेल वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही की तुलना में आयात में 13 प्रतिशत की कमी आई है।, जिसका मुख्य कारण जुलाई 2024 के दौरान 18.6 लाख टन का रिकॉर्ड आयात है।
शंकर ठक्कर सरकार के निर्णय को साहसिक और समय पर उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि इससे रिफाइंड पामोलीन के आयात में कमी आई है और मांग पुनः कच्चे तेल की ओर मुड़ गई है, जिससे घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है और कुछ रिफाईनरीज जो बंद के कगार पर चली गई थी वह पुनर्जीवित होने लगी है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप है, जो घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देगा, क्षमता उपयोग बढ़ाएगा, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करेगा और रोज़गार के अवसर पैदा करेगा। यह निर्णय उद्योग, सरकार और उपभोक्ताओं, तीनों के लिए फायदेमंद है।


