■ बावधन स्थित सिद्धीचा गणपति के दर्शन कर महाआरती में लिया सहभाग, आयोजन समिति ने किया सत्कार।
मुंबई वार्ता/संजय जोशी

सुर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. संजय बी. चोरडिया ने बावधन स्थित सिद्धीचा गणपति के दर्शन किए और महाआरती में सहभाग लिया। इस दौरान प्रोफेसर डॉ. संजय ने सिद्धीचा गणपति मंडल की सजावट में महिलाओं की उत्कृष्ट भूमिका की सराहना की, जो अयोध्या के राम मंदिर की थीम पर आधारित है तथा जिसमें मंदिर की भव्य प्रतिकृति और भगवान श्रीराम की सुंदर प्रतिमा स्थापित की गई थी।


गणेशोत्सव के पावन अवसर पर सुर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षित कुशल भी साथ थे। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सिद्धीचा गणपति मंडल की सजावट अयोध्या राम मंदिर की थीम पर आधारित रही, जिसमें राम मंदिर की आकर्षक प्रतिकृति और भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा ने सैकड़ों श्रद्धालुओं को दर्शन व आशीर्वाद के लिए आकर्षित किया।विशेष बात यह रही कि यह मंडल पिछले तीन वर्षों से 1500 महिलाओं की टीम द्वारा अनुशासन, निष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है।


अध्यक्ष श्रीमती पियुषा दगडे पाटिल व किरण दगडे के नेतृत्व में महिला समिति बनुमति महादेवन, सीमा राव, दिव्या खैतान, हेमलता, बबीता श्रीवास्तव और सुमति संजय द्वारा सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन व अन्य सभी व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट समन्वय करती है। मंडल के इन प्रयासों को पीसीएमसी आयुक्त पुरस्कार द्वारा लगातार दो वर्षों तक सम्मानित भी किया गया है। सिद्धीचा गणपति मंडल केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक मंच भी है। यहाँ नृत्य, संगीत, सुंदरकांड पाठ जैसे विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक उपक्रमों का आयोजन होता है, जिससे बावधन और पुणे की संपूर्ण समाजरचना में एकता का संदेश प्रसारित होता है। प्रतिदिन आरती व प्रसाद वितरण का आयोजन कर समाज के सभी परिवारों को सहभागी बनाया जाता है।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने श्रीमती उमेशजी वर्जे दंपत्ति, किरण दगडे और श्रीमती पियुषा दगडे को पौधा और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान के प्रत्युत्तर में दगडे परिवार ने भी डॉ. चोरडिया एवं अक्षित कुशल का अभिनंदन किया। इस पारस्परिक अभिनंदन ने आपसी सौहार्द, सम्मान और एकता का संदेश दिया। समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. चोरडिया ने कहा कि राम मंदिर थीम श्रद्धा और प्रेरणा का प्रतीक है। अयोध्या नहीं जा पाने वाले भक्त भी यहाँ उसी आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव किए हैं। इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं का एकजुट होकर यह आयोजन करना समाज के लिए प्रेरणादायी है। यह सेवा भाव और सांस्कृतिक एकता समाज को मजबूत बनाती है। वे बोले, गणपति केवल भक्ति का ही नहीं बल्कि सेवा, एकता और समाज को लौटाने का पर्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे उत्सव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दें और समाज में सांस्कृतिक व सामाजिक एकता को प्रोत्साहन दें। प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया की इस उपस्थिति से श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ा तथा उन्होंने महिला मंडल की मेहनत व अनुशासित कार्यशैली की सराहना की, जिसने इस वर्ष का गणेशोत्सव एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अनुभव बना दिया।


