मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

मराठा-कुणबी जाति को लेकर शासन द्वारा लिए गए निर्णय के विरोध में आज अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद की ओर से मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी मा. सौरभ कटियार को आंदोलन की भूमिका स्पष्ट करते हुए एक निवेदन सौंपा गया। यह निवेदन परिषद के मुंबई अध्यक्ष सदानंद मंडलिक के नेतृत्व में और पंकजभाऊ भुजबळ तथा समीरभाऊ भुजबळ के मार्गदर्शन में प्रस्तुत किया गया।


इस अवसर पर परिषद के मुंबई सरचिटणीस साराताई वाडेकर, योगेश मांजरेकर, ईशान्य मुंबई जिला अध्यक्ष विजय गोरे, दक्षिण मुंबई जिला अध्यक्ष शिरीषकर, उत्तर पश्चिम जिला अध्यक्ष दशरथ कुराडे, उत्तर मध्य जिला अध्यक्ष बुच्चया पाल, उत्तर मुंबई जिला अध्यक्ष ललन पाल और संतोष साबळे आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।


समता परिषद के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि मराठा समाज को ‘कुणबी’ कहे जाने से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ अन्याय हो रहा है। यह निर्णय सामाजिक समता और आरक्षण की मूल भावना के खिलाफ है। इसलिए मराठा-कुणबी जाति मान्यता से संबंधित शासन निर्णय (जी.आर.) को तुरंत रद्द किया जाए — यह प्रमुख माँग इस निवेदन में रखी गई।
ईशान्य मुंबई के जिला अध्यक्ष विजय गोरे ने कहा कि यदि शासन ने जल्द ही इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो समता परिषद राज्यव्यापी तीव्र आंदोलन छेड़ेगी। संगठन सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


