मुंबई वार्ता संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बार फिर अपनी आदत के अनुसार GST दर कटौती का श्रेय लेने की कोशिश की। 2017 में मोदीजी ने ही स्वयं अत्यधिक बढ़े हुए दरों के साथ GST लागू कर देश के उद्योग, व्यापारी और आम नागरिकों को परेशान किया था, उनकी भारी आर्थिक लूट की थी। वही मोदीजी आज GST दर कम करने का श्रेय लेकर अपनी पीठ थपथपाते नज़र आए। पिछले आठ सालों में GST संग्रह दोगुना होकर 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है और इसका सबसे बड़ा बोझ उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दर कम करने का श्रेय लेते समय आठ साल बढ़े हुए दर से की गई लूट की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है।


इस संदर्भ में प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी ने बहुत पहले ही कह दिया था कि मोदीजी ने GST को “गब्बर सिंह टैक्स” में बदल दिया है। दर घटाकर जनता की लूट बंद करो, यह माँग उन्होंने लगातार की थी। उस पर निर्णय लेने में मोदीजी ने कई साल देर की। पेट्रोल-डीज़ल के दामों पर तो मोदीजी आज भी चुप हैं। जनता को स्वदेशी का उपदेश देने वाले प्रधानमंत्री खुद विदेशी गाड़ियाँ, घड़ियाँ, पेन और फ़ोन इस्तेमाल करते हैं। ‘आत्मनिर्भरता’ का पाठ पढ़ाते समय वे खुद ऐशो-आराम की ज़िंदगी में डूबे हुए हैं। उन्होंने आज कहा कि यह “बचत महोत्सव” है, तो क्या पिछले आठ साल “लूट महोत्सव” चल रहा था? यह भी उन्हें बताना चाहिए।


उनके आज के भाषण में उत्साह और आत्मविश्वास की कमी थी। शायद देशभर में गूँज रहे “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे और जनता में बढ़ती नाराज़गी का ही यह प्रतिबिंब हो। प्रधानमंत्री ने जनता को गुमराह करने वाले भाषण देने के बजाय महँगाई, बेरोज़गारी, खेती और किसानों की समस्याओं को हल करने का ईमानदार प्रयास करना चाहिए, ऐसा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा।


