मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

नेता जहाल भूपति समेत ६० से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। ये सभी नक्सली समाज की मुख्यधारा में आ गए हैं। उन्होंने हथियार डालकर संविधान अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि विकास का रास्ता बंदूक के डर से नहीं खुलता, बल्कि लोकतंत्र से विकास होता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नक्सली आंदोलन के इतिहास का वर्णन किया और अगली कार्ययोजना की भी घोषणा की।


पिछले १० वर्षों से महाराष्ट्र में माओवाद के विरुद्ध एक बड़ी लड़ाई लगातार चल रही है। आज उस लड़ाई को निर्णायक सफलता मिली है। सोनू उर्फ भूपति समेत 61 जहाल माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस पूरी त्रासदी में माओवाद का उभार। खासकर गढ़चिरौली में अहेरी दलम, सिरोंचा दलम, पेरिमलम दलम, चामोर्शी दलम, टीपा गढ़ दलम द्वारा सशस्त्र बल गठित किए गए थे। इसकी रीढ़ और मस्तिष्क निश्चित रूप से सोनू उर्फ भूपति था। आज उसके आत्मसमर्पण के कारण यह रीढ़ समाप्त हो गई है। उत्तर गढ़चिरौली में माओवाद का सफाया पहले ही हो चुका था।
अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि दक्षिण गढ़चिरौली में माओवाद का सफाया हो गया है। अब केवल ८-१० लोग बचे हैं, जिन्हें १० की उंगलियों पर गिना जा सकता है, हमें विश्वास है कि वे भी आत्मसमर्पण करेंगे, क्योंकि उनका कोई नेता नहीं बचा है, मुख्यमंत्री ने यह विश्वास व्यक्त किया है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि गढ़चिरौली में माओवाद जल्द ही समाप्त हो जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च २०२६ से पहले माओवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र ने उससे पहले ही माओवाद और नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों को बधाई दी।


