श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

बीएमसी की कार्रवाई के बमुश्किल दो दिन बाद, अनधिकृत फेरीवाले कोलाबा कॉजवे पर वापस आ गए, जिससे स्थानीय निवासियों को काफी निराशा हुई है। स्थानीय नागरिकों ने बोरीवली का हवाला देते हुए कहा कि,” बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय की कोशिशों से बोरीवली फेरीवाला मुक्त हो गया है तो कोलाबा क्यों नहीं फेरीवालों से मुक्त हो रहा है ?”


नागरिकों ने कहा कि कार्रवाई सतही लगती है, ऐसे अभियान केवल अस्थायी राहत प्रदान करते हैं। स्थानीय नागरिको ने कहा, “वे उन्हें एक दिन हटा देते हैं और अगली सुबह वे वापस आ जाते हैं। हॉकर्स भी जानते हैं कि कार्रवाई जारी नहीं रहेगी और इसलिए वे लौट जाते हैं।”


स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि अधिकारी यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि फेरीवालों को उस समय दूर रखा जाए जब प्रधान मंत्री जैसा कोई वीआईपी उसी रास्ते से गुजर रहा हो। अगर यह किया जा सकता है तो आम जनता के लिए क्यों नहीं हो सकता हैं?”
स्थानीय लोगों ने इस इलाके की सख्त और निरंतर निगरानी की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि अतिक्रमण के कारण चलने की जगह तक नहीं बची है और पैदल चलने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ रही है।


एक स्थानीय निवासी ने कहा कि यह बार-बार होने वाला मामला बन गया है। हमारे अपने इलाके के फुटपाथों पर चलना असंभव है। बीएमसी को यह भी पता है कि अवैध फेरीवाले बेदखल होने के बाद वापस आ जाते हैं और ऐसी कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है कि फेरीवाले वापस न आएं।
स्थानीय लोगों ने बोरीवली के विधायक संजय उपाध्याय की कोशिशों की तारीफ की है और मांग की है कि कोलाबा को भी फेरीवालों से मुक्त कराने के लिए स्थानीय नेताओं को जवाबदारी उठानी चाहिए।
मंगलवार को बीएमसी ने कोलाबा कॉजवे पर अवैध रूप से काम कर रहे 67 फेरीवालों पर कार्रवाई की। हालांकि बेदखली अभियान के दौरान ही, कई स्थानीय लोगों ने कहा कि कार्रवाई एक दिन भी नहीं टिक पाएगी।


