■ जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी – शरद पवार
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी के लिए पुणे में ४० एकड़ सरकारी ज़मीन सस्ते दामों पर खरीदे जाने का मामला सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि इस ज़मीन खरीद-फरोख्त के लिए सिर्फ़ ५०० रुपये का स्टाम्प शुल्क लिया गया और सिर्फ़ दस्तावेज़ी सबूत ही सामने आए। इसके बाद विपक्ष द्वारा इस मामले में सरकार पर निशाना साधने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जाँच के आदेश दिए।


इस बीच, क्या इस मामले में पार्थ पवार को बचाया जा रहा है? यह सवाल शरद पवार से पूछा गया था। शरद पवार ने कहा था कि इसका जवाब सिर्फ़ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही दे सकते हैं। जिसके बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया सामने आई है।


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिन लोगों ने दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए और लेन-देन किया, वे इसमें शामिल हैं। उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। कंपनी के आधिकारिक हस्ताक्षरकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, सरकार में बैठे उन लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है जिन्होंने उनकी मदद की। हम किसी को बचाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम किसी को बचाएँगे भी नहीं। जो कुछ भी हुआ है, वह नियमों के मुताबिक हुआ है। मैंने पहले भी कहा है कि इस अपराध की जाँच के दौरान अगर किसी की संलिप्तता पाई जाती है, तो भी हमें कार्रवाई करनी होगी। इसलिए, यह कार्रवाई नियमों के मुताबिक ही करनी होगी।
शरद पवार ने क्या कहा?
शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने इस संबंध में एक जाँच समिति बनाई है। इसलिए, हमें देखना चाहिए कि इस समिति की रिपोर्ट से क्या निष्कर्ष निकलते हैं। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। अगर मुख्यमंत्री खुद कह रहे हैं कि यह एक गंभीर मामला है, तो इसकी जाँच होनी चाहिए और इसकी असली तस्वीर समाज के सामने पेश की जानी चाहिए।


