■ पिछले साल से 40% आगे, कुल रकबा 9.14 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा।
■ अच्छी बारिश के चलते मिट्टी में नमी बनी रही, जिससे किसानों ने रबी बुवाई में दिखाई तेजी : शंकर ठक्कर
मुंबई वार्ता संवाददाता

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया महाराष्ट्र कृषि विभाग द्वारा जारी किएताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस वर्ष रबी फसलों की बुवाई 9.14 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 40% अधिक है।


सामान्य परिस्थितियों में राज्य में रबी फसलों का औसत रकबा करीब 57.8 लाख हेक्टेयर रहता है।इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की समय पर समाप्ति और अंतिम चरण में हुई पर्याप्त बारिश से मिट्टी में नमी बनी रही, जिससे किसानों ने रबी बुवाई में तेज़ी दिखाई।आंकड़ों के अनुसार, गेहूं का रकबा बढ़कर 78,894 हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 41,698 हेक्टेयर था। चना की बुवाई 91,915 हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल के 42,878 हेक्टेयर से अधिक है। कुल दलहन क्षेत्रफल (जिसमें मसूर शामिल है) 3.54 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह 2.06 लाख हेक्टेयर था। केवल मसूर की बुवाई 43,592 हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल के 10,316 हेक्टेयर से चार गुना से अधिक है।


कृषि विभाग ने बताया कि इस सीज़न में गेहूं, ज्वार, जौ, सरसों और चना जैसी प्रमुख रबी फसलों की प्रगति उत्साहजनक है। राज्य के जलाशयों में इस समय 92% पानी भंडारण है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 87.2% था, जिससे सिंचाई सुविधाओं में सुधार की संभावना बनी हुई है।*शंकर ठक्कर ने आगे कहा तिलहन जिसके लिए हमें आयात पर निर्भर होना पड़ता है का रकबा भी बढ़कर 12,850 हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 4,947 हेक्टेयर था। इनमें सूरजमुखी की बुवाई 9,909 हेक्टेयर दर्ज की गई, जो पिछले साल के 4,406 हेक्टेयर से आगे है। रवि फसलों की बुवाई बढ़ाने का एक कारण भारत सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से मदद का भी है।



किसानों को फायदा मिलेगा