मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई की एक अदालत ने गुरुवार को माल और सेवा कर (जीएसटी) के पूर्व सहायक आयुक्त, अशोक नायक को रिश्वत मामले में पांच साल जेल की सजा सुनाई, जिसमें कहा गया कि उनका “कार्य किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है”।


भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मामलों के विशेष न्यायाधीश, एवी खारकर ने नायक को भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के तहत और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश के लिए दोषी पाया। कोर्ट ने उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.मामला मई 2017 का है जब केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तत्कालीन सहायक आयुक्त नायक पर मुंबई में बार और रेस्तरां चलाने वाले एक व्यवसायी ने रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
प्राप्त शिकायत के अनुसार, नायक ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास लंबित एक मामले को निपटाने के लिए 12 करोड़ रुपये की मांग की, और गिरफ्तारी से बचने के लिए रिश्वत का 25-30 प्रतिशत तुरंत भुगतान करने को कहा।शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि नायक ने मामले को सुलझाने के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) में एक “वरिष्ठ नौकरशाह” के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की पेशकश की। 12 करोड़ रुपये की शुरुआती मांग को बाद में घटाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया।
एसीबी ने जाल बिछाया और नायक को 1.25 करोड़ रुपये की पहली किस्त लेते समय गिरफ्तार कर लिया।अदालत ने कहा कि सबूत बिना किसी संदेह के साबित करते हैं कि आरोपी ने अवैध रिश्वत की मांग की और स्वीकार किया।अदालत ने कहा, “एक लोक सेवक के रूप में, उनसे अपेक्षा की गई थी कि वे अपने कर्तव्यों पर ईमानदारी से ध्यान देंगे और उन्हें ईमानदारी से निभाएंगे। उनका कृत्य नरमी के लायक नहीं है।”
हालाँकि, नायक की उम्र और हृदय संबंधी बीमारी को देखते हुए, अदालत ने कठोर कारावास के बजाय साधारण कारावास की सजा सुनाई।


