भटकते कुत्तों और सड़क पर रहने वाले जानवरों के संबंध में दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार करें:-मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन।

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■ मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन, पदाधिकारियों और पशु-प्रेमियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए हज़ारों पत्र।

मुंबई वार्ता संवाददाता

भटकते कुत्तों और सड़क पर रहने वाले जानवरों की समस्या को हल करने के लिए एक सर्वसमावेशी दृष्टिकोण आवश्यक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला मनुष्य और जानवरों के सह-अस्तित्व में अनावश्यक दूरी पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह अपने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाकर इस मामले को संविधान पीठ के समक्ष रखे और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद नए सिरे से विचार करे, ऐसा मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 नवंबर को भटकते कुत्तों पर दिए गए निर्णय के पुनर्विचार की मांग करते हुए देशभर के पशुप्रेमियों ने हज़ारों की संख्या में सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजे हैं। मुंबई यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष ज़ीनत शबरीन और यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों ने भी इस विषय पर पत्र भेजे। शनिवार दोपहर को ज़ीनत शबरीन अपने साथियों के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास स्थित पोस्ट ऑफिस पहुँचीं, जहाँ उन्होंने और उनके सहयोगियों ने सुप्रीम कोर्ट को अपने पत्र भेजे।

सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और व्यावहारिक दृष्टि से लागू करना बेहद कठिन है। इस निर्णय को लागू करने की ज़िम्मेदारी जिन संस्थाओं पर है, उनके पास न तो पर्याप्त बजट है और न ही आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। भटकते जानवर अपनी पीड़ा, डर या अधिकार व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनके साथ संवेदनशीलता और न्याय के साथ व्यवहार करना ही सच्चे अर्थों में मानवीय दायित्व है। करुणा, मानवता और ज़िम्मेदारी हमारे समाज के मूल मूल्य हैं, और इनका संरक्षण हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मुंबई में भटकते कुत्तों पर कार्रवाई शुरू की गई है, लेकिन यह आदेश व्यापक है और क्रियान्वयन के लिए विशेष शर्तों के साथ है। ऐसी किसी भी कार्रवाई से पहले उचित शेल्टर, चिकित्सा सुविधाएँ, दत्तक प्रोत्साहन तंत्र और ABC (Animal Birth Control) केंद्र स्थापित करना आवश्यक है। लेकिन इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं को स्थापित किए बिना सीधी कार्रवाई करना न केवल अमानवीय और अव्यावहारिक है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

इस अवसर पर पंकज चौधरी, अजय मिश्रा, अमनदीप सैनी, आसिफ खान, तेजस चंदूरकर, शेखर जगताप, प्रज्ञा धवले, निखिल रुपारेल सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

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