■ इस प्रदर्शन में जीएसटी की दरों में की गई कटौती का भी सकारात्मक प्रभाव हुआ है : शंकर ठक्कर.
मुंबई वार्ता संवाददाता

कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क लगाने के बावजूद भारत के विनिर्माण और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों ने लचीलापन दिखाया है, जबकि घरेलू मांग में निरंतर सुधार जारी रहा है।


भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई–सितंबर तिमाही में 8.2% की सालाना वृद्धि दर्ज की, जो पिछली तिमाही के 7.8% के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन है।इस दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार मोर्चे पर भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। टैरिफ दबावों और बाहरी अवरोधों के बीच भी अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन भारत की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है। मजबूत उपभोक्ता खर्च, विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती गतिविधियों और घरेलू मांग की मजबूती ने इस तेजी को सहारा दिया है।
यह वृद्धि कई संस्थानों के अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों से भी अधिक रही, जिन्होंने 7.3% की वृद्धि का अनुमान लगाया था। लगातार मजबूत होते आर्थिक संकेतक बताते हैं कि भारत की विकास क्षमता वैश्विक परिस्थितियों की अनिश्चितता के बीच भी स्थिर बनी हुई है।भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए है। वहीं, रूस, अमेरिका, चीन जैसे दूसरे प्रतिस्पर्धी कोरोना महामारी के बाद से अपने जीडीपी प्रदर्शन को लेकर कुछ बेहतर नहीं कर पाए हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच चल रहे युद्ध और उथल-पुथल के बीच दुनिया वृद्धि की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
भारत की तुलना दूसरे देशों से करें तो जून तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर 5.2 फीसदी, इंडोनेशिया की 5.2 फीसदी, अमेरिका की 2.1 फीसदी, जापान की 1.2 फीसदी, यूके की 1.2 फीसदी, फ्रांस की 0.7 फीसदी, मेक्सिको की 0 फीसदी और जर्मनी की -0.2 फीसदी रही।*शंकर ठक्कर ने भारत की अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन की सराहन ना करते हुए कहा यह उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नीतिगत स्थिरता और निरंतरता का परिणाम है। जो दीर्घावधि स्थिरता और वृद्धि को बल दे रहा है। भारत 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित जीडीपी के साथ 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है।
इस वृद्धि को बढ़ावा देने में देश के विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्र का अहम योगदान रहा। इस विकास को लेकर निजी निवेश में तेजी, बढ़ते उपभोक्ता विश्वास, वेतन वृद्धि और मजबूत कृषि उत्पादन से बढ़ती ग्रामीण मांग भी महत्वपूर्ण कारक रहे। इसके साथ हमारी मांग पर भारत सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में कटौती करने से भुगतान की खरीद शक्ति में बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।



जय हिंद