मुंबई वार्ता संवाददाता

लखनऊ की एक साधारण सी गली से निकली यह कहानी आज पूरे देश में करुणा, आस्था और निःस्वार्थ सेवा का संदेश दे रही है। मानव देसाई मूलतः लखनऊ निवासी, स्वयं को सनातनी मानने वाले, विश्व बंधुत्व की भावना से ओतप्रोत और हनुमान जी को अपना इष्ट मानने वाले एक ऐसे साधक हैं, जिनका जीवन संघर्ष से साधना और साधना से सेवा तक की प्रेरक यात्रा बन चुका है।


मानव देसाई का जीवन आरंभ में किसी भी आम नागरिक से अलग नहीं था। चाय का व्यापार किया पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। घाटा हुआ, आर्थिक संकट गहराया और जीवन में एक खालीपन सा महसूस हुआ। इसी दौर में उन्होंने आत्मचिंतन का मार्ग चुना और अयोध्या की ओर प्रस्थान किया। शायद नियति उन्हें वहीं बुला रही थी।हनुमान गढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन के दौरान उनकी भेंट एक ऐसे संत से हुई, जिन्होंने बिना कोई संवाद किए, मानव के जीवन, मन और संघर्ष को शब्दों में उतार दिया। संत ने उन्हें राम नाम की शक्ति का बोध कराया और कुछ ऐसा गुप्त ज्ञान प्रदान किया, जो शरीर को पीड़ा से मुक्त करने की एक साधना-पद्धति थी। उस क्षण मानव को यह एहसास हुआ कि उनका जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं बल्कि दूसरों के दुख-दर्द हरने के लिए है।


अयोध्या से लौटने के बाद मानव देसाई ने ‘मानव स्वास्थ्य सेवा संस्थान’ की स्थापना की। लखनऊ के हनुमान मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार उन्होंने निःशुल्क सेवा प्रारंभ की। राम नाम के उच्चारण के साथ वे गुरुप्रदत्त विद्या से लोगों के घुटनों, कमर, गर्दन और अन्य शारीरिक पीड़ाओं का उपचार करने लगे। धीरे-धीरे यह सेवा आस्था का केंद्र बन गई। अनेक लोगों ने राहत महसूस की और मानव के सेवा की चर्चा फैलने लगी।सेवा का दायरा सीमित न रहे, इसी भावना से मानव देसाई ने साइकिल उठाई और ‘दर्दमुक्त भारत अभियान’ का संकल्प लेकर देश भ्रमण पर निकल पड़े।
उनका उद्देश्य था घर-घर, जन-जन तक राम नाम की शक्ति और पीड़ामुक्त जीवन का संदेश पहुंचाना। जब साइकिल ने साथ छोड़ दिया, तब भी उनका संकल्प नहीं डगमगाया। उन्होंने साइकिल छोड़ दी और पैदल ही यात्रा जारी रखी।काशी, प्रयागराज, विंध्याचल जैसे पावन तीर्थों में उन्होंने संतों और श्रद्धालुओं की निःस्वार्थ सेवा की। हाल ही में संपन्न बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दिल्ली-वृंदावन यात्रा में भी मानव देसाई सक्रिय रूप से शामिल रहे और बड़ी संख्या में भक्तों व संतों को अपनी सेवा प्रदान की।फिलहाल मानव देसाई मुंबई के अंधेरी क्षेत्र में उपस्थित हैं, जहां बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा के आयोजन से पहले और कथा के दौरान वे स्थानीय लोगों की निःशुल्क सेवा के लिए उपस्थित हैं।
महानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में दर्द और तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए उनकी सेवा किसी संबल से कम नहीं है। राम नाम के साथ दी जा रही यह सेवा, आस्था और अनुभव का अद्भुत संगम बनती जा रही है।मानव ने अपनी इस साधना और सेवा को नाम दिया है ‘राम नाम थेरेपी’ और अपने अभियान को नाम दिया है ‘दर्दमुक्त भारत’। उनका सपना है कि राम जी की कृपा से वे एक ऐसा आश्रम स्थापित करें, जहां जरूरतमंदों को निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिले। उनका लक्ष्य केवल उपचार नहीं अपितु सेवा, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से पूरे भारत को पीड़ामुक्त बनाना है।
मानव देसाई के कार्य, उनकी सेवा और उनके सपनों से जुड़ी विस्तृत जानकारी ‘दर्दमुक्त भारत’ नाम से इंस्टाग्राम आईडी और यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। मानव फोन नंबर 9335707396 पर उपलब्ध हैं। मानव के ‘दर्दमुक्त भारत’ का सपना कब और कितना साकार होगा, यह तो समय बताएगा पर इतना निश्चित है कि राम नाम की आस्था, सेवा का संकल्प और मानवता के प्रति समर्पण से भरी मानव देसाई की यह यात्रा अनवरत जारी रहेगी।


