मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर एक बार फिर माहौल गरमाने के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने राज्य सरकार से तत्काल समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को मराठा और ओबीसी समाज के मुद्दे पर दो दिनों के भीतर रास्ता निकालना चाहिए, ताकि त्योहारों के दौरान सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।


मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शशिकांत शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री मराठा और ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर रहे हैं। इस बैठक में क्या निष्कर्ष निकलता है, यह देखना होगा। हालांकि, त्योहारों के समय सामाजिक तनाव बढ़ना उचित नहीं है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए।
■ सरकार के आश्वासनों पर उठाए सवाल
शिंदे ने कहा कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील का यह कहना कि मनोज जरांगे पाटील संतुष्ट नहीं हैं, सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ के लिए आश्वासन देकर सत्ता हासिल की गई, लेकिन अब उन आश्वासनों को पूरा करने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि आज हर समाज को यह महसूस हो रहा है कि उसके साथ अन्याय हो रहा है। ऐसे में सरकार की असली परीक्षा है। मराठा आंदोलन के मुद्दे पर सरकार के भीतर ही कथित तौर पर प्रतिस्पर्धा चल रही है। सरकार को दिए गए आश्वासनों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन जरांगे पाटील में यह भावना पैदा हो गई है कि जानबूझकर आश्वासन पूरे नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार की आंतरिक प्रतिस्पर्धा के कारण आश्वासन पूरे नहीं हो रहे हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है?
■ MPSC आंदोलनकारी युवाओं का समर्थन जरूरी
MPSC के मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं का समर्थन करना सभी राजनीतिक दलों का कर्तव्य है। आंदोलन कर रहे युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर किसी तरह की टिप्पणी करना आंदोलन का मजाक उड़ाने जैसा है। ऐसे बयानों के गंभीर राजनीतिक परिणाम संबंधित लोगों को भुगतने पड़ सकते हैं, ऐसा इशारा भी शशिकांत शिंदे ने दिया।
उन्होंने कहा कि MPSC अध्यक्ष ने परीक्षा में हुई गलती को स्वीकार किए जाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में वर्तमान अध्यक्ष और सचिव को जिम्मेदार ठहराया जाएगा या नहीं, यह स्पष्ट होना चाहिए। शिंदे ने कहा कि पहले इस तरह की घटनाओं के बाद संबंधित मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ता था। यदि पेपर लीक जैसी घटनाओं के बावजूद अब कोई इस्तीफा नहीं होता है, तो इसकी राजनीतिक कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी।
■ DJ को लेकर सरकार से भूमिका स्पष्ट करने की मांग
गणेशोत्सव से पहले DJ के मुद्दे पर भी शशिकांत शिंदे ने सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि DJ पर प्रतिबंध सरकार ने नहीं, बल्कि न्यायालय ने लगाए हैं। त्योहार मनाते समय नियमों का पालन किया जाना चाहिए। यदि DJ को अनुमति दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार कानून बनाएगी या नहीं, यह स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव शुरू होने से पहले सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। त्योहारों को अलग स्वरूप दिया जा रहा है और अश्लील नृत्य जैसे प्रकारों पर सरकार एवं पुलिस को स्पष्ट नियमावली लागू करनी चाहिए। शिंदे ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि कौन-सा त्योहार किस धर्म को मनाना चाहिए। उन्होंने दहीहंडी में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह एकता की मिसाल है।
■ बांधों से पानी छोड़ने पर सूखे का खतरा
राज्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए शशिकांत शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी पूरे महाराष्ट्र का जायजा ले रही है। यदि बांधों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया तो अप्रैल-मई में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सूखा घोषित कर किसानों को सहायता देने की मांग की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 दिनों तक स्थिति पर नजर रखी जाएगी और इसके बाद किसानों के साथ मजबूती से खड़े होकर उनकी समस्याओं को उठाया जाएगा।
■ विलय की कोई चर्चा नहीं
पार्टी के विलय से जुड़े सवाल पर शशिकांत शिंदे ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी उनकी पार्टी आंदोलन शुरू करती है, तभी विलय से संबंधित खबरें सामने आती हैं। अजितदादा के समय ऐसा निर्णय हुआ था, लेकिन वर्तमान में इस संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई है।
■ नगरसेवक पद रद्द करने की कार्रवाई पर भी सवाल
शशिकांत शिंदे ने नगरसेवक पद रद्द करने की कार्रवाई को धमकी जैसा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी गलतियां दिखाकर विपक्षी नेताओं को अयोग्य ठहराया जा रहा है। सत्ता पक्ष के आवेदन तेजी से निपटाए जाते हैं, तो विपक्ष के आवेदनों पर फैसला क्यों नहीं किया जाता?
उन्होंने आरोप लगाया कि मामलों का फैसला सुविधा के अनुसार किया जा रहा है, जबकि विपक्ष की अपीलों पर ‘तारीख पर तारीख’ का सिलसिला जारी है। सरकार से उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की।


