■ अजित रावराणे के खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन को तेजिंदर सिंह तिवाना का समर्थन; बीएमसी प्रशासन के रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी।
मुंबई वार्ता संवाददाता

गणेशोत्सव से पहले मलाड क्षेत्र में पानी की किल्लत को लेकर नागरिकों में भारी नाराजगी है। कई इलाकों में कम दबाव, अपर्याप्त और कथित तौर पर गंदे पानी की आपूर्ति से लोग परेशान हैं। इसी मुद्दे को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ‘पी-पूर्व’ और ‘पी-पश्चिम’ प्रभाग समिति की बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के रवैये के खिलाफ तीखा विरोध जताया।


जनता को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वार्ड क्रमांक 43 के पार्षद अजित रावराणे खाली बर्तन लेकर बीएमसी कार्यालय के बाहर जमीन पर धरने पर बैठ गए। उनके आंदोलन को स्थायी समिति सदस्य एवं पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना ने समर्थन दिया और पानी की समस्या को लेकर बीएमसी प्रशासन पर सवाल उठाए।


जानकारी के अनुसार, प्रभाग समिति की बैठक में मलाड के नागरिकों को हो रही पानी की समस्याओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। गणेशोत्सव नजदीक होने के कारण नागरिकों को पर्याप्त और नियमित पानी उपलब्ध कराने के लिए उपायुक्त (जोन-4) से प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल मुलाकात कर समस्या का समाधान करने की मांग की गई।
हालांकि, प्रतिनिधियों के अनुसार, उपायुक्त ने यह कहते हुए मामले से दूरी बना ली कि पानी की आपूर्ति का विषय जल अभियंता विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसका उनके विभाग से संबंध नहीं है। प्रशासन के इस रुख पर पार्षद तेजिंदर सिंह तिवाना ने नाराजगी जताई।
तिवाना ने सवाल उठाया कि जब पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए जनप्रतिनिधि सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं, तब नगर निगम प्रशासन इस मुद्दे के प्रति इतना संवेदनहीन कैसे रह सकता है। उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नागरिकों के पानी के अधिकार के लिए सभी पार्षदों से एकजुट होने का आह्वान किया और रावराणे के धरने को अपना समर्थन दिया।
इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्षद भी एकजुट हो गए और बीएमसी कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। इस दौरान “पानी दो, पानी दो” और “नागरिकों को उनके हक का पानी मिलना चाहिए” जैसे नारे लगाए गए।
गणेशोत्सव से ठीक पहले मलाड में पानी का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से भी गरमा गया है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि बीएमसी प्रशासन ने जल आपूर्ति की समस्या के समाधान के लिए तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।


