मुंबई वार्ता संवाददाता

महाड़ नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई मारपीट के मामले में राज्य के मंत्री भरत गोगावले के पुत्र विकास गोगावले को बड़ा कानूनी झटका लगा है। इस मामले में विकास गोगावले द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मतदान के दिन हुई हिंसा से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म था, और अब अदालत के इस फैसले से पूरे रायगढ़ जिले में हलचल मच गई है। खास बात यह है कि इससे पहले भी दो अलग-अलग अदालतें उन्हें राहत देने से इनकार कर चुकी हैं।


महाड़ नगर परिषद की आम चुनाव प्रक्रिया के तहत 2 दिसंबर 2025 को मतदान जारी था। इसी दौरान वार्ड क्रमांक 2 में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। इस समय शिंदे गुट के पदाधिकारियों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई। इस हिंसा में एनसीपी के पदाधिकारियों पर हमला करने का आरोप विकास गोगावले और उनके समर्थकों पर लगाया गया है।घटना के बाद महाड़ पुलिस थाने में विकास गोगावले सहित कुल 29 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। हालांकि, एफआईआर दर्ज होते ही सभी आरोपी फरार हो गए और अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं।
गिरफ्तारी से बचने के लिए विकास गोगावले ने अदालत का रुख किया था। उन्होंने माणगांव अदालत में दो बार अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की, लेकिन दोनों बार अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने मुंबई की अदालत में भी अपील की, जहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। लगातार तीसरी बार जमानत खारिज होने से उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटकती हुई नजर आ रही है।
जानकारी के अनुसार वे पिछले 24 दिनों से फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। इस मामले में एनसीपी के पदाधिकारी नाना जगताप भी अब तक फरार बताए जा रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई होने की चर्चा जोरों पर है। महाड़ नगर परिषद चुनाव के दौरान विकास गोगावले और सुशांत जाबरे समर्थकों के बीच बड़ा टकराव हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ परस्पर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बाद से सभी आरोपी भूमिगत हो गए हैं, जिससे पुलिस प्रशासन के सामने गिरफ्तारी की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।राजनीतिक मोर्चे पर नया मोड़ संभवइस मारपीट के मामले को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर चल रहे अंतर्विरोध की भी पृष्ठभूमि बताई जा रही है। राज्य में महायुति सरकार बनने के बाद से ही पालकमंत्री पद को लेकर मंत्री भरत गोगावले और एनसीपी नेता सुनील तटकरे के बीच तनाव बना हुआ है। बीते कुछ महीनों से एक-दूसरे के गुट के कार्यकर्ताओं को तोड़ने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही बढ़ता विवाद मतदान के दिन हिंसा में बदल गया।अदालत के ताजा फैसले के बाद अब यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक मोर्चे पर भी नया मोड़ ले सकता है, ऐसा संकेत मिल रहा है।



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