मुंबई वार्ता संवाददाता

जेनेरिक दवाओं के नाम पर चल रही कथित अनियमितताओं और मनमानी व्यावसायिक प्रथाओं पर चिंता जताते हुए भारतीय जनता पार्टी, मुंबई प्रोफेशनल सेल ने केंद्र सरकार से सख्त नियमन की मांग की है। प्रोफेशनल सेल के अध्यक्ष सीए शैलेश आर. घेडिया की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र भेजा गया है।


पत्र में कहा गया है कि जेनेरिक दवाएं आम जनता के लिए राहत का माध्यम बनी हैं, लेकिन इसी के साथ कुछ निर्माता और वितरक भारी छूट के नाम पर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं का शोषण हो रहा है बल्कि दवा व्यवसाय की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।भाजपा प्रोफेशनल सेल ने सुझाव दिया है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कौन-सी दवा जेनेरिक है और कौन-सी नहीं। इसके लिए दवा के पैकेट पर बड़े और साफ़ अक्षरों में ‘जेनेरिक मेडिसिन’ लिखा जाना अनिवार्य किया जाए।
पत्र में 60 से 80 प्रतिशत तक की छूट वाले विज्ञापनों पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया है कि पहले एमआरपी बढ़ाकर फिर भारी छूट देना उपभोक्ताओं को गुमराह करने का तरीका है। ऐसे में जेनेरिक दवाओं के लिए निश्चित एमआरपी तय करना अधिक व्यावहारिक समाधान होगा।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मेडिकल स्टोर जेनेरिक दवाओं को ब्रांडेड दवाओं की तरह बेचकर अत्यधिक मुनाफ़ा कमा रहे हैं और वास्तविक छूट का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच रहा। साथ ही, केवल सस्ती कीमत के आधार पर दवाओं की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।


