मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य में आगामी महानगरपालिका चुनावों का बिगुल बजते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मीरा-भायंदर महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में भाजपा नेता कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। “मीरा-भायंदर का मेयर उत्तर भारतीय होगा”— उनके इस दावे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कड़ा विरोध जताया है।


ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने इसे सीधे तौर पर भाजपा का एजेंडा बताया है।एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए कृपाशंकर सिंह ने कहा कि, “मीरा-भायंदर समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की सत्ता आएगी। हम इतनी बड़ी संख्या में पार्षद चुनकर लाएंगे कि उत्तर भारतीय समाज का मेयर बनाना आसान हो जाएगा।” उत्तर भारतीय मतदाताओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से दिया गया यह बयान अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।‘यह भाजपा का एजेंडा है’।


■ संजय राऊत का हमला
कृपाशंकर सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने भाजपा पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “मुंबई या अन्य जगहों पर मराठी मेयर न बनने देना ही भाजपा का एजेंडा है। इसी उद्देश्य से कृपाशंकर सिंह को आगे किया गया है ताकि वैसा माहौल बनाया जा सके। यह बयान अनजाने में नहीं, बल्कि भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
”संजय राऊत ने आगे कहा, “परप्रांतीय मतदाताओं को शिवसेना, मनसे और मराठी समाज के खिलाफ मतदान के लिए उकसाया जा रहा है। कृपाशंकर के बाद योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य और सम्राट चौधरी जैसे नेता भी यहां लाए जाएंगे। भाजपा वह पार्टी नहीं है जो महाराष्ट्र के स्वाभिमान के लिए खड़ी रही हो। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन या सीमाविवाद के संघर्ष में भाजपा की कोई भूमिका नहीं रही है।”
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मीरा-भायंदर महानगरपालिका चुनाव अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित न रहकर मराठी बनाम परप्रांतीय राजनीति के केंद्र में आते नजर आ रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


