श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महायुति और आठवाले के बीच गठबंधन की घोषणा होते ही दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच “चूहा- बिल्ली” का खेल शुरू हो गया है। जिन सीटों पर भाजपा और आठवले गुट के बीच समझौता हुआ है उन सीटों के भाजपा उम्मीदवार गायब हो गए हैं और भाजपा नेता उनकी तलाश में जुटे हुए हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार आठवले गुट (आर पी आई) ने भाजपा से मुंबई महानगर पालिका चुनावों के लिए 30 सीटों की मांग की थी। आखिरकार दोनों के बीच 17 सीटों पर साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर समझौता हो गया है। आठवले गुट ने वादे के अनुसार 13 सीटों से अपने उम्मीदवारों को हटा दिया है और भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन दे दिया है।
कुछ सीटों पर शिवसेना के घोषित उम्मीदवारों को भी पीछे ले लिया गया है लेकिन जिन 17 सीटों पर आठवले गुट के उम्मीदवारों को भाजपा उम्मीदवारों की जगह युति का उम्मीदवार बनाया गया है, उन सीटों के भाजपा उम्मीदवार नाम वापस लेने की बजाय गायब हो गए हैं।


एक ओर भाजपा नेता उम्मीदवार के पीछे पीछे चुनाव निशान वापस लेने के लिए भाग रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा के उम्मीदवार पार्टी निशान को बचाने के लिए फरार हो गए हैं। कुछ भाजपा उम्मीदवारों ने अपना फोन बंद कर घर से बाहर अंजान जगह चले गए हैं। जिससे उनसे संपर्क नहीं किया जा सके और उम्मीदवारी वापस लेने की तारीख गुजराते ही वे वापस प्रकट हुए तो उनके पास पार्टी का निशान बना रहेगा।
इस “चूहा-बिल्ली” के खेल को समझते हुए आठवले और भाजपा नेताओं ने ऐसी जगहों पर फ्रेंडली लड़ाई की बात करना शुरू कर दिया है।
ये पब्लिक है बाबू सब जानती है- उम्मीदवारों को समझा नहीं सकते तो आठवले गुट को फ्रेंडली लड़ाई का चुरन चटाया जा रहा है। चुनावी लड़ाई तो लड़ाई है- जनता जानना चाहती है कि-ये “फ्रेंडली लड़ाई ” क्या होती है ? एक दूसरे को पहले आप बोलकर जीतने दोगे या चुनाव लड़ोंगे !


