मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई के मुंबादेवी इलाके में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की महत्वाकांक्षी रोबोटिक पार्किंग टॉवर परियोजना इन दिनों विवादों में घिर गई है। परियोजना लगभग पूरी होने के अंतिम चरण में थी, तभी राज्य सरकार की ओर से इस पर स्थगन लगा दिया गया। इस फैसले से BMC प्रशासन को बड़ा झटका लगा है।


स्थानीय नागरिकों ने इस परियोजना के खिलाफ BMC और राज्य सरकार के पास शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसके बाद मंदिर की विरासत संरचना का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने विधानसभा में इस कार्य पर रोक लगाने का निर्देश दिया।इस मामले में परियोजना के ठेकेदार मेसर्स एसएमएस लिमिटेड की ओर से वकील संदेश देशपांडे ने BMC को कानूनी नोटिस भेजी है।
ठेकेदार ने लवाद (आर्बिट्रेशन) क्लॉज के तहत परियोजना रुकने से हुए नुकसान के लिए ₹55 करोड़ की भरपाई की मांग की है।BMC प्रशासन ने पहले ही राज्य सरकार को सूचित किया था कि इस परियोजना में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं है।
BMC आयुक्त भूषण गगराणी ने चेतावनी दी थी कि यदि परियोजना लंबी अवधि तक रुकी रही तो इसकी लागत और बढ़ सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्देश न मिलने के कारण परियोजना पर लगी रोक बरकरार है।
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा स्थगन दिए जाने के बाद विवाद और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अब ठेकेदार ने कानूनी कदम उठाया है। ठेकेदार का कहना है कि बिना किसी ठोस या तकनीकी कारण के, केवल राजनीतिक दबाव में आकर काम रोका गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।ठेकेदार ने यह भी दावा किया है कि परियोजना पूरी तरह तैयार होने के बावजूद उसे रोकना अनुचित है और नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी BMC की है।
BMC आयुक्त भूषण गगराणी ने पहले स्पष्ट किया था कि यदि श्रद्धालुओं के मार्ग में कोई बाधा नहीं आती तो खुद मुंबादेवी मंदिर चैरिटीज को भी इस पार्किंग टॉवर से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी बताया था कि इस मामले में राज्य सरकार को दो बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। प्रशासन की ओर से इस विवाद का समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।


