■ चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) द्वारा अपनाई गई भूमिका गलत, पार्टी स्तर पर गलत निर्णयों का समर्थन कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
मुंबई वार्ता संवाददाता

चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) ने भाजपा को समर्थन देकर गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया, लेकिन कांग्रेस ने परभणी महापौर चुनाव में गठबंधन धर्म निभाया है। परभणी में शिवसेना (उबाठा) का महापौर और कांग्रेस का उपमहापौर चुना गया है। भाजपा को सत्ता से दूर रखने, इंडिया गठबंधन, महाविकास आघाड़ी, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस के सभी 12 नगरसेवकों ने शिवसेना (उबाठा) के पक्ष में मतदान किया, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है।


बुलढाणा में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि चंद्रपुर महानगरपालिका में शिवसेना (उबाठा) ने जो भूमिका निभाई, उसे लेकर मन में कोई खेद या बदले की भावना रखना कांग्रेस की संस्कृति नहीं है।
चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के 8 नगरसेवक होते हुए भी उन्होंने भाजपा को वोट दिया, यह राजनीतिक दृष्टि से गलत है। और यदि पार्टी स्तर पर इसका समर्थन किया जाता है तथा कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की जाती है, तो यह उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि चंद्रपुर के संदर्भ में सांसद संजय राऊत के साथ कांग्रेस नेताओं ने चर्चा की थी। कांग्रेस नेता शिवसेना (उबाठा) के लगातार संपर्क में थे। इसके बावजूद संजय राऊत और उनके दल के लोगों द्वारा दिए गए बयान गलत हैं और गठबंधन धर्म के अनुरूप नहीं हैं। वंचित बहुजन आघाड़ी कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है। उनके 2 नगरसेवक अनुपस्थित रहे, जिन्हें पार्टी ने निलंबित कर दिया तथा शहर अध्यक्ष पर भी कार्रवाई की गई। लेकिन शिवसेना (उबाठा) ने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उसका समर्थन किया। यह कांग्रेस पार्टी किसी भी स्थिति में सहन नहीं करेगी।परभणी में कांग्रेस का महापौर बनाने का प्रस्ताव हमारे पास था, लेकिन सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाना कांग्रेस की नीति नहीं है।
हमने सत्ता को ठुकराकर गठबंधन धर्म निभाया और शिवसेना (उबाठा) के साथ खड़े रहे। गठबंधन में शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस के वोट लेती है, लेकिन कांग्रेस को वोट नहीं देती—इस पर चंद्रपुर और परभणी की घटनाओं ने मुहर लगा दी है, ऐसा भी सपकाल ने कहा।


