मुंबई वार्ता संवाददाता

गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना के चरण 3-बी के तहत दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी परिसर में बनने वाली जुड़वा सुरंग के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के पुर्जों को ‘लॉन्चिंग शाफ्ट’ में उतारने की प्रक्रिया बुधवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई। यह काम तय समय से करीब तीन महीने पहले शुरू होने से परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है।


बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आयुक्त भूषण गगराणी ने कार्यस्थल पर पहुंचकर इस प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने से सुरंग की वास्तविक खुदाई का काम जल्द शुरू हो सकेगा।पश्चिम और पूर्व उपनगरों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए BMC द्वारा 12.20 किलोमीटर लंबा गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है।


इस परियोजना के तहत गोरेगांव स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से लेकर मुलुंड के खिंडीपाड़ा तक समानांतर दो भूमिगत सुरंगें बनाई जाएंगी। प्रत्येक सुरंग की लंबाई लगभग 4.70 किलोमीटर होगी। सुरंगों का व्यास 14.20 मीटर तथा संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में 13 मीटर रखा गया है। ये सुरंगें पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह पहाड़ी के नीचे भूमिगत बनाई जा रही हैं।सुरंगों में तीन-तीन लेन होंगी। साथ ही वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, वर्षा जल निकासी और अन्य उपयोगिता सेवाओं की आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।


इन सुरंगों की खुदाई अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए की जाएगी।इस परियोजना में अब तक की मुंबई की सबसे बड़ी 14.49 मीटर व्यास वाली दो TBM मशीनें (S-118 और S-119) उपयोग में लाई जाएंगी, जिन्हें टेराटेक कंपनी ने तैयार किया है। प्रत्येक मशीन का वजन लगभग 2175 मीट्रिक टन है।दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के लिए आवश्यक लॉन्चिंग शाफ्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है। यह शाफ्ट लगभग 200 मीटर लंबा, 50 मीटर चौड़ा और 30 मीटर गहरा है।
TBM को स्थापित करने के लिए शाफ्ट के तल पर 20×20×2.5 मीटर का मजबूत कंक्रीट क्रैडल तैयार किया गया है, जो मशीन को स्थिर रखने और खुदाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।बुधवार से TBM के पुर्जों को शाफ्ट में उतारने का कार्य शुरू हुआ। इसके लिए 800 मीट्रिक टन और 350 मीट्रिक टन क्षमता की अत्याधुनिक क्रेनों का उपयोग किया जा रहा है, जिनकी लोड टेस्टिंग पहले ही सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। पहले ही दिन 135 मीट्रिक टन वजनी ‘टाइप-ए शील्ड’ यानी खुदाई करने वाले मुख्य हिस्से को सफलतापूर्वक शाफ्ट में उतारा गया।
मशीन के मुख्य तकनीकी हिस्से जैसे मेन शील्ड, कटर हेड, स्क्रू कन्वेयर, मेन बेयरिंग और इरेक्टर की असेंबली पहले ही पूरी हो चुकी है। अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से शाफ्ट में स्थापित कर TBM की अंतिम संरचना तैयार की जाएगी, जिसके बाद सुरंग की खुदाई का काम शुरू होगा।दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान होते हुए मुलुंड के अमर नगर तक भूमिगत खुदाई पूरी होने के बाद TBM मशीन को मुलुंड स्थित ‘रिट्रीवल शाफ्ट’ से बाहर निकाला जाएगा और उसके पुर्जों को अलग किया जाएगा।
इस मौके पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर, उप आयुक्त (इन्फ्रास्ट्रक्चर) गिरीश निकम, प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुले, उप प्रमुख अभियंता नरेश मेघराजानी, कार्यकारी अभियंता नामदेव रावकाले सहित अन्य अधिकारी और अभियंता उपस्थित थे।


