मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि मुंबई को प्रतिदिन औसतन करीब 4,100 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आपूर्ति होती है, जबकि शहर की अनुमानित मांग 4,665 एमएलडी है। इस तरह मुंबई में रोजाना लगभग 565 एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है।यह जानकारी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी। यह प्रश्न चर्कोप के विधायक योगेश सागर ने चल रहे बजट सत्र के दौरान उठाया था।


विधायक सागर ने सवाल किया था कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा रोजाना लगभग 4,000 एमएलडी पानी की आपूर्ति के बावजूद मुंबई के कई इलाकों में, खासकर दिसंबर 2025 के दौरान, लोगों को पानी के लिए परेशान क्यों होना पड़ा। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या झुग्गी-झोपड़ी और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पानी पाने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।


सरकार के जवाब में बताया गया कि पानी की आपूर्ति व्यवस्था सुधारने और नुकसान कम करने के लिए बीएमसी लगातार कदम उठा रही है।1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच शहर में 11,540 जगहों पर पाइपलाइन लीकेज की पहचान कर उन्हें ठीक किया गया, जिससे पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिली।इसके अलावा वर्ष 2025-26 के दौरान शहर में 58 किलोमीटर पुरानी और जर्जर पानी की पाइपलाइन को बदला गया, ताकि जल आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो सके।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मुंबई की कई पुरानी चॉल इमारतों में ग्राउंड लेवल पर पानी के भंडारण टैंक नहीं हैं, इसलिए उन्हें सीधे नगर निगम की जल वितरण पाइपलाइन से पानी मिलता है। वहीं पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरत के अनुसार नगर निगम के पंपिंग स्टेशनों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाती है।सरकार ने स्वीकार किया कि फिलहाल शहर में 565 एमएलडी पानी की कमी है, लेकिन इसे दूर करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
इनमें गर्गई बांध परियोजना, जिससे मुंबई को 440 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलेगा, और 200 एमएलडी क्षमता का समुद्री जल विलवणीकरण (डिसेलिनेशन) प्रोजेक्ट शामिल हैं।उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि इन परियोजनाओं पर काम जारी है, इसलिए पानी की समस्या को हल करने में देरी का सवाल नहीं उठता।


