■ ‘अधूरे और असुरक्षित’ फ्लैट लेने से इनकार
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) द्वारा संचालित गोरेगांव के सिद्धार्थ नगर स्थित पत्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना एक बड़े विवाद में फंस गई है। 2008 में शुरू हुई और 2018 में MHADA द्वारा संभाली गई इस परियोजना में अब हालात ऐसे बन गए हैं कि निवासी पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन चेन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।


महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं सहित प्रदर्शनकारी निवासियों का आरोप है कि उन्हें जो पुनर्वास फ्लैट दिए जा रहे हैं, वे असुरक्षित, अधूरे और कानूनी रूप से अस्पष्ट हैं। वहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद MHADA ने 10 मार्च से फ्लैटों का आवंटन शुरू कर दिया है।


निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
निवासियों ने नए भवनों में कई खामियां गिनाई हैं:
दीवारों में सीलन और फर्श खराब
खोखली दीवारें और निम्न गुणवत्ता के दरवाजे
इमारतों से प्लास्टर झड़ना
अधूरा काम और पार्किंग की कमी


विवाद का एक बड़ा कारण जरूरी दस्तावेजों का अभाव है:
स्थायी वैकल्पिक आवास समझौता (PAAA) अभी तक अंतिम रूप में नहीं
डेवलपमेंट एग्रीमेंट (DA) निष्पादित नहीं
‘फोर्स्ड पजेशन’ यानी बिना समझौते के फ्लैट देने का आरोप
सांसद ने उठाए सवाल
मुंबई उत्तर-पश्चिम से सांसद रवींद्र वायकर ने MHADA के CEO संजीव जायसवाल को पत्र लिखकर कई गंभीर मुद्दे उठाए:
त्रिपक्षीय समझौते (PAAA) का उल्लंघन
लंबित DA और PAAA
पार्किंग जैसी सुविधाओं की कमी
2014 से किराया मुआवजे में देरी
उन्होंने तत्काल मरम्मत और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
MHADA का पक्ष
MHADA के उपाध्यक्ष और CEO संजीव जायसवाल ने कहा:
PAAA का ड्राफ्ट कोर्ट-नियुक्त पर्यवेक्षकों द्वारा मंजूर
फ्लैट लगभग एक साल से तैयार
“कुछ निवासी” विरोध कर रहे हैं और अन्य लोगों को रोक रहे हैं
सुरक्षा चिंताओं पर उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “असल वजह क्या है, यह पता लगाइए।”
आंदोलन जारी
भूख हड़ताल पर बैठे निवासियों की मांग स्पष्ट है:
पहले सभी खामियां दूर की जाएं
सभी कानूनी समझौते पूरे किए जाएं
उसके बाद ही फ्लैट का कब्जा दिया जाए
जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


