श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आयुक्त पद को लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस अहम पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन फिलहाल दो अधिकारी सबसे आगे माने जा रहे हैं।


सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुंबई मेट्रो की प्रबंध निदेशक अश्विनी भिडे तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. मिलिंद म्हैसकर इस दौड़ में प्रमुख दावेदार हैं। माना जा रहा है कि अंतिम चयन इन दोनों में से किसी एक का हो सकता है।इसके अलावा, इस रेस में राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी और नगर विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता के नाम भी चर्चा में हैं।


वहीं सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वी. राधा का नाम भी शुरुआती दौर में सामने आया था, लेकिन साल के अंत तक उनकी दिल्ली में संभावित प्रतिनियुक्ति के कारण उनकी दावेदारी कमजोर मानी जा रही है।अश्विनी भिडे 1995 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक संभाली हैं। वर्तमान में वे मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ-साथ मुंबई मेट्रो परियोजना की प्रबंध निदेशक भी हैं। उनके उत्कृष्ट कार्य के चलते उन्हें “मेट्रो वूमन” के नाम से भी जाना जाता है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कई मौकों पर उनके काम की सराहना की है।
दूसरी ओर, डॉ. मिलिंद म्हैसकर 1992 बैच के अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं और सार्वजनिक निर्माण विभाग में उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है। उनके प्रशासनिक अनुभव के चलते उन्हें भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यदि सरकार अश्विनी भिडे को मुख्यमंत्री कार्यालय और मेट्रो परियोजना की जिम्मेदारी में ही बनाए रखने का निर्णय लेती है, तो म्हैसकर का पलड़ा भारी हो सकता है।
बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस लेंगे। इससे पहले वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से चर्चा करेंगे। नगर विकास विभाग शिंदे के पास होने और मुंबई महानगरपालिका में उनकी पार्टी की भूमिका को देखते हुए उनके मत को विशेष महत्व दिया जाएगा।कुल मिलाकर, मुंबई जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण शहर के प्रशासन की कमान किसके हाथ में जाएगी, इसे लेकर उत्सुकता चरम पर है।
सरकार अनुभव, कार्यक्षमता और वर्तमान जिम्मेदारियों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।


