शालेय पोषण आहार योजना पर सवाल सामाजिक लेखा-परीक्षण, खाद्य सुरक्षा और शिकायत निवारण पर सरकार से जवाब तलब – सांसद वर्षा गायकवाड।

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नई दिल्ली,मुंबई वार्ता संवाददाता

पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री और सांसद वर्षा गायकवाड ने लोकसभा में ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ (पूर्व में मध्यान्ह भोजन योजना) को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल योजना का नाम बदलने से उसके मूल उद्देश्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि इसकी प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना जरूरी है।

सांसद गायकवाड ने पूछा कि क्या इस योजना का महाराष्ट्र में सही तरीके से संचालन हो रहा है, किन-किन खाद्य पदार्थों का वितरण किया जा रहा है, और क्या इसका सामाजिक लेखा-परीक्षण (सोशल ऑडिट) किया गया है।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पंजीकृत विद्यार्थियों और वास्तविक लाभ लेने वाले छात्रों की संख्या में अंतर क्यों है और इसकी जांच के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।उन्होंने आगे कहा कि पिछले तीन वर्षों में जिलावार मूल्यांकन किया गया है या नहीं, तथा योजना के तहत शामिल स्कूलों, लाभार्थियों की संख्या और खर्च किए गए फंड का पूरा विवरण सरकार को देना चाहिए। साथ ही, छात्रों की अनुपस्थिति और भोजन वितरण में अनियमितताओं की जांच की आवश्यकता भी उन्होंने जताई।

सांसद ने योजना में सामने आ रही समस्याओं पर भी ध्यान आकर्षित किया, जैसे रसोइयों और सहायकों की कथित कमी तथा उनके मानदेय के भुगतान में देरी। इसके अलावा, उन्होंने पूछा कि क्या पोषण स्तर सुधारने के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित मिलेट्स (ज्वार, बाजरा आदि) और अंडे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि योजना के तहत सामाजिक लेखा-परीक्षण, खाद्य सुरक्षा जांच और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं।सरकार की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ केंद्र प्रायोजित योजना है, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से चलाई जाती है। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। देशभर में इस योजना के तहत 10.35 लाख से अधिक स्कूलों में करीब 11 करोड़ बच्चों को लाभ मिल रहा है।महाराष्ट्र में 2021-22 और 2022-23 के दौरान 2% स्कूलों तथा 2024-25 में 5% स्कूलों में सामाजिक लेखा-परीक्षण किए गए हैं। हालांकि, पंजीकृत और लाभार्थी विद्यार्थियों की संख्या में कुछ अंतर पाया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि रसोइयों और सहायकों (CCH) की कोई कमी नहीं है और मानदेय के भुगतान में भी कोई देरी नहीं हो रही है।

■ महाराष्ट्र में पर्यटन विकास पर भी उठाए सवाल

सांसद वर्षा गायकवाड ने महाराष्ट्र में पर्यटन विकास को लेकर भी केंद्र सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।उन्होंने विशेष रूप से अजंता की गुफा और एलोरा की गुफाओं जैसे विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थलों के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

साथ ही, राज्य में तटीय, पर्यावरण-पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट के विकास की भी मांग की।सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि ‘स्वदेश दर्शन’ और ‘तीर्थक्षेत्र पुनरुद्धार एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। महाराष्ट्र में तटीय और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी केंद्र सरकार सहयोग कर रही है।

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