मुंबई वार्ता संवाददाता

एक विशेष पॉक्सो अदालत ने शुक्रवार को 2019 में एक मानसिक रूप से अक्षम नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में 32 वर्षीय आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।


विशेष न्यायाधीश वी ए पत्रावले ने जलगांव निवासी आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
मामले के अनुसार, 15 वर्षीय पीड़िता, जिसकी ‘सामाजिक आयु’ लगभग साढ़े चार वर्ष के बराबर आंकी गई थी, 29 मई 2019 को ठाणे जिले के कल्याण रेलवे स्टेशन पर रोते हुए मिली थी। एक टैक्सी चालक ने उसे देखा और संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। मेडिकल जांच में पता चला कि वह पांच महीने की गर्भवती थी।
जांच में सामने आया कि आरोपी, जो पीड़िता की मौसी का पति है, ने जलगांव में उसका यौन शोषण किया और गर्भवती होने पर उसे 400 किलोमीटर दूर कल्याण स्टेशन पर छोड़कर फरार हो गया।
डीएनए जांच में यह पुष्टि हुई कि सितंबर 2019 में जन्मे बच्चे का जैविक पिता वही आरोपी है। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए।
अपने विस्तृत फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने लड़की की कमजोर मानसिक स्थिति का फायदा उठाया और उसे बिना किसी सहारे के रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि “उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए यह भगवान की कृपा थी कि उसे समय पर सही लोगों द्वारा बचा लिया गया।”
अदालत ने आरोपी पर 40,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो पीड़िता को दिया जाएगा। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि पीड़िता को उसके पुनर्वास, इलाज और विशेष जरूरतों के लिए उचित मुआवजा दिया जाए।


