मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में प्रभाग क्रमांक 47 के नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने पूर्वी द्रुतगति महामार्ग (Eastern Express Highway) पर किए गए करोड़ों रुपये के खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए और पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की। उनके विरोध के बाद संबंधित प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया गया।


तिवाना ने बताया कि नवंबर 2022 से महानगरपालिका के अधीन आए इस महामार्ग पर गड्ढा-मुक्ति और मरम्मत के नाम पर भारी खर्च किया गया है। वर्ष 2023 में मानसून पूर्व मरम्मत कार्यों के लिए करीब ₹93 करोड़ खर्च किए गए, जो बाद में बढ़कर ₹109 करोड़ हो गए। यह काम के.आर. कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था, जिसकी गारंटी अवधि 2 वर्ष तय की गई थी।


इसके बाद वर्ष 2024 में भी विभिन्न कार्यों पर बड़े पैमाने पर खर्च किया गया, जिसमें सर्विस रोड मरम्मत (मास्टिक) पर ₹85 करोड़, मस्टिक सुधारणा पर ₹18 करोड़, जियो-पॉलिमर सुधारणा पर ₹9 करोड़ और माइक्रो सरफेसिंग पर ₹46.31 करोड़ खर्च किए गए।
तिवाना ने सवाल उठाया कि जब इतने बड़े स्तर पर खर्च पहले ही किया जा चुका है, तो फिर दोबारा ₹63 करोड़ का माइक्रो सरफेसिंग कार्य देने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि इससे पहले किए गए कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि जब पुराने काम अभी गारंटी अवधि में हैं, तब नए कार्य देना क्या ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने या गारंटी शर्तों को दरकिनार करने का प्रयास है?
तिवाना ने पिछले वर्ष माइक्रो सरफेसिंग पर खर्च हुए करीब ₹43 करोड़ के कार्यों की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी मांगी।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2023 से अब तक गड्ढा मरम्मत और संबंधित कार्यों पर हुए सभी खर्च और ठेकेदारों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की जाए। तिवाना के अनुसार, उस दौरान प्रशासनिक स्तर पर मनमाने फैसले लिए गए होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और इसमें भ्रष्टाचार की भी जांच जरूरी है।
इस मुद्दे को लेकर स्थायी समिति में जोरदार चर्चा हुई और अंततः प्रस्ताव को रोकते हुए पूरे मामले की जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया।


