मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) की सभी बसों को वर्ष 2035 तक इलेक्ट्रिक बसों में बदलने की दिशा में राज्य सरकार और एसटी महामंडल ने तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर पूरे राज्य में कम से कम 200 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष Pratap Sarnaik ने इसकी जानकारी दी।


मंत्रालय में आयोजित एसटी महामंडल के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस परियोजना के तहत संबंधित डेवलपर को करीब 1500 वर्गफुट जमीन किराये पर उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि एसटी बसों की चार्जिंग के अलावा अन्य समय में निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को भी इन स्टेशनों पर चार्जिंग की अनुमति दी जाएगी। इससे एसटी महामंडल को कम लागत में ई-बस चार्जिंग सुविधा मिलेगी। साथ ही, डेवलपर द्वारा उपयोग की गई जमीन का किराया और निजी वाहनों की चार्जिंग से होने वाले मुनाफे का तय हिस्सा राजस्व के रूप में एसटी महामंडल को प्राप्त होगा।
प्रताप सरनाईक ने विश्वास जताया कि इस सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना के जरिए भविष्य में एसटी महामंडल पर्यावरण अनुकूल ई-बस व्यवस्था के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा।
■ 20 हजार ई-बसों के लिए बनेगी व्यवस्था
एसटी महामंडल ने वर्ष 2035 तक अपनी सभी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में परिवर्तित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए भविष्य में करीब 20 हजार ई-बसों हेतु आवश्यक चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
राज्यभर में एसटी महामंडल की उपलब्ध जमीनों पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर डेवलपर्स द्वारा अत्याधुनिक चार्जिंग सुविधा विकसित की जाएगी, जहां एसटी की ई-बसों को चार्ज किया जाएगा।
इस बैठक में एसटी महामंडल के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक Dr. Madhav Kusekar, वित्तीय सलाहकार Girish Deshmukh सहित सभी विभाग प्रमुख उपस्थित थे।


