मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

Flora Foundation और Muskan Sanstha ने राजस्थान के डूंगरपुर में संयुक्त रूप से एक सराहनीय पहल करते हुए ‘जहां देवालय वहां विद्यालय’ अभियान के तहत ‘फ्लोरा फाउंडेशन गुरुकुल’ की स्थापना की है। इस गुरुकुल में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिक मूल्य और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जाएगा।


यह कार्यक्रम प. पू. जैन मुनि Jain Muni Shri Jin Ratna Ji के पावन सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है। गुरुकुल संचालन में फ्लोरा फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं मुंबई के पूर्व उपमहापौर Babubhai Bhavanji तथा मुस्कान संस्था के चेयरमैन Bharat Nagda Jain की प्रमुख भूमिका है।


बाबूभाई भवानजी ने बताया कि आश्रम शाला में छात्रों को शास्त्रों का ज्ञान, भारतीय संस्कृति, देशभक्ति, इंसानियत, स्वरोजगार, सेल्फ डिफेंस, नैतिक मूल्य और आत्मनिर्भरता की शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति उसकी शिक्षा पद्धति पर निर्भर करती है। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होने के बावजूद नैतिक शिक्षा की कमी के कारण युवा पीढ़ी भौतिकवाद की ओर अधिक आकर्षित हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में गुरुकुल और विद्याश्रमों में चरित्र निर्माण एवं नैतिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता था, लेकिन लंबे समय तक पराधीनता के कारण शिक्षा का उद्देश्य केवल अर्थोपार्जन तक सीमित हो गया। इसके परिणामस्वरूप ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, परोपकार, समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं जैसे मूल्यों में कमी आई है।
भवानजी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में नैतिक शिक्षा का समावेश समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य दिए जाएंगे तो वे भविष्य में आदर्श नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे।
उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र — तीनों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे भ्रष्टाचार, स्वार्थपरता, छल-कपट और असहिष्णुता जैसी बुराइयों को दूर करने में मदद मिलती है तथा मानवतावादी चेतना का विकास होता है।


