मुंबई वार्ता संवाददाता

कांग्रेस पार्टी द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे “संगठन सृजन अभियान” के अंतर्गत जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों की घोषणा करते समय व्यापक सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया गया है। सामाजिक संतुलन, विभिन्न समाज घटकों का प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक क्षमता और स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेतृत्व जैसे मानदंडों के आधार पर ये नियुक्तियां की गई हैं।अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी ने राज्य में जिला अध्यक्ष नियुक्ति प्रक्रिया को अत्यंत व्यापक और संगठनात्मक तरीके से संचालित किया था।


पार्टी द्वारा नियुक्त वरिष्ठ पर्यवेक्षकों ने प्रत्येक जिले में लगभग 10 दिनों तक प्रवास कर कांग्रेस पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, पूर्व पदाधिकारियों, स्थानीय नेताओं तथा विभिन्न समाज घटकों से विस्तृत संवाद किया। जिला स्तर की संगठनात्मक स्थिति, स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता, जनाधार, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पार्टी विस्तार की क्षमता का अध्ययन कर पर्यवेक्षकों ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी को जिला अध्यक्षों के नामों की सिफारिशें सौंपी थीं।इन सिफारिशों को अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे द्वारा अंतिम मंजूरी दिए जाने के बाद जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा की गई है।
कुल 69 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है, जिनमें विभिन्न समाज घटकों को निम्नानुसार प्रतिनिधित्व दिया गया है।
* ओपन वर्ग – 24
* ओबीसी – 22
* अल्पसंख्यक – 7
* अनुसूचित जाति (SC) – 7
* अनुसूचित जनजाति (ST) – 3
* VJNT – 2
* महिला – 3
इन नियुक्तियों से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पार्टी ने सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए समावेशी संगठनात्मक संरचना खड़ी करने का प्रयास किया है। विशेष रूप से ओबीसी समाज के विभिन्न घटकों को बड़े पैमाने पर प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिनमें आगरी, धनगर, कोमटी, कोष्टी, कुणबी, लेवा पाटील, लिंगायत, माली, तेली जैसे समाजों को अवसर प्रदान किया गया है। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग में बौद्ध, मातंग, हिंदू खाटीक जैसे समाज घटकों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। अल्पसंख्यक समाज में मुस्लिम समुदाय को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। इसके चलते कांग्रेस द्वारा सामाजिक संतुलन साधने के प्रयास की चर्चा राजनीतिक हलकों में शुरू हो गई है।
नियुक्त किए गए जिला अध्यक्षों की औसत आयु लगभग 50 वर्ष है और पार्टी ने अनुभवी तथा संगठनात्मक कार्य का व्यापक अनुभव रखने वाले नेतृत्व पर विश्वास जताया है। साथ ही नई पीढ़ी को अवसर देने का प्रयास भी इस प्रक्रिया में दिखाई देता है।इस अभियान के साथ ही प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य के पर्यवेक्षकों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। पर्यवेक्षकों ने प्रत्येक तालुका में जाकर कार्यकर्ताओं, स्थानीय पदाधिकारियों तथा कांग्रेस की विभिन्न आघाड़ियों और सेल संगठनों के साथ संवाद करते हुए संगठनात्मक समीक्षा की।
इसके बाद रिक्त पड़े तालुका अध्यक्षों तथा विभाग, आघाड़ी और सेल संगठनों के पदों पर नियुक्तियां की गईं और राज्यभर में लगभग सात हजार नए पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है।कांग्रेस पार्टी के इस व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन के माध्यम से आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक संघर्षों के लिए पार्टी सभी समाज घटकों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है, ऐसा स्पष्ट संदेश दिया गया है।


