मालाड के Rejoice School पर धर्मांतरण के आरोपों की गूंज, नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने मांगी गहन जांच।

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श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई महानगरपालिका की प्रभाग समिति की बैठक में मालाड स्थित Rejoice School को लेकर कथित धर्मांतरण गतिविधियों और शैक्षणिक भूखंड के दुरुपयोग का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। नगरसेवक एवं स्थायी समिति सदस्य Tejinder Singh Tiwana ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित संस्था की मान्यता रद्द करने तथा व्यापक जांच की मांग की।


तिवाना ने प्रभाग समिति में हरकती के मुद्दे के माध्यम से आरोप लगाया कि महानगरपालिका की प्राथमिक शाला हेतु आरक्षित भूखंड का उपयोग कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों, प्रार्थना सभाओं, अंधविश्वास फैलाने तथा धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मालवण पुलिस स्टेशनें 11 मई 2026 को अपराध क्रमांक 0770/2026 दर्ज किया गया है।


बैठक में बोलते हुए तिवाना ने कहा कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है और शैक्षणिक भूमि का उपयोग यदि धर्मांतरण, अंधविश्वास या मानसिक प्रभाव डालने जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि महानगरपालिका की भूमि का उपयोग यदि मूल उद्देश्य से हटकर हो रहा है, तो उसकी तत्काल और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।


तिवाना ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने संबंधित संस्था की कार्यप्रणाली, आर्थिक लेन-देन और आरोपों की गहन जांच कराने की मांग की। साथ ही यह भी जांच करने की मांग की कि शैक्षणिक भूखंड के आवंटन की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि कहीं शैक्षणिक परिसर का उपयोग धार्मिक कार्यक्रमों, धर्मांतरण गतिविधियों या आस्था के नाम पर उपचार जैसे कार्यों के लिए तो नहीं किया गया।


उन्होंने Maharashtra Anti-Superstition and Black Magic Act तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी की। तिवाना ने कहा कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्था को आवंटित भूखंड तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।


उन्होंने शिक्षा विभाग, संपत्ति विभाग, भवन एवं कारखाना विभाग, परवाना विभाग तथा स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही भूखंड हस्तांतरण और मंजूरी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई करने की भी मांग उठाई।


तिवाना ने भविष्य में शैक्षणिक संस्थाओं को भूखंड आवंटन से पहले उनके कार्य, विदेशी निधि और धार्मिक संबंधों की कठोर जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी मांग की कि इस प्रकरण में विदेशी फंडिंग, संदिग्ध आर्थिक लेन-देन अथवा आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़े किसी भी पहलू की जांच Enforcement Directorate, आर्थिक अपराध शाखा और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कराई जाए।


उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि विदेशी निधि का उपयोग धार्मिक प्रभाव स्थापित करने, धर्मांतरण गतिविधियों या समाज में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया गया है, तो संबंधित संस्था के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।


तिवाना ने कहा कि मुंबईकरों ने पारदर्शी और कानून का सम्मान करने वाला प्रशासन चुना है तथा शैक्षणिक भूमि के दुरुपयोग या कानून उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हित, मुंबईकरों की भावनाओं और कानून के सम्मान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

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