मुंबई वार्ता संवाददाता

सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा मांगी गई जानकारी में मुंबई रेल विकास निगम (MRVC) की दो महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान कुल 1,574 अतिक्रमण चिन्हित होने का खुलासा हुआ है। इनमें से अब तक 998 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 17,068 वर्गमीटर भूमि अतिक्रमण की चपेट में पाई गई।


एमआरवीसी द्वारा 14 जुलाई 2026 को आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार यह जानकारी कल्याण–बदलापुर तीसरी एवं चौथी रेल लाइन परियोजना तथा ऐरोली–कलवा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना से संबंधित है।
■ कल्याण–बदलापुर तीसरी एवं चौथी रेल लाइन परियोजनाएमआरवीसी के अनुसार मध्य रेलवे के कल्याण से बदलापुर के बीच तीसरी एवं चौथी रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान 706 अतिक्रमण चिन्हित किए गए। इनमें रेलवे की भूमि तथा नव-अधिग्रहित भूमि पर स्थित झोपड़ियां और अन्य निर्माण शामिल हैं। इनमें से 620 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 9,668 वर्गमीटर भूमि अतिक्रमित पाई गई।एमआरवीसी ने यह भी बताया कि प्रत्येक अतिक्रमण अलग-अलग वर्षों में हुआ है, इसलिए किसी एक निश्चित वर्ष का उल्लेख करना संभव नहीं है। परियोजना के लिए चिन्हित अतिक्रमण कल्याण और बदलापुर रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित हैं।
■ ऐरोली–कलवा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना
ऐरोली–कलवा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान 868 अतिक्रमण चिन्हित किए गए। इनमें रेलवे भूमि एवं नव-अधिग्रहित भूमि पर बने निर्माण शामिल हैं। अब तक 378 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 7,400 वर्गमीटर भूमि अतिक्रमण के कब्जे में पाई गई। यह अतिक्रमण दिघा गांव और कलवा स्टेशन के बीच स्थित हैं। एमआरवीसी ने यहां भी स्पष्ट किया कि सभी अतिक्रमण अलग-अलग वर्षों में हुए हैं।
■ पुनः अतिक्रमण की जानकारी उपलब्ध नहीं
आरटीआई आवेदन में यह भी पूछा गया था कि अतिक्रमण हटाने के बाद कितने स्थानों पर पुनः अतिक्रमण हुआ। इस पर एमआरवीसी ने उत्तर दिया कि संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं (N.A.) है।
■ अनिल गलगली ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि मुंबई की रेल परियोजनाओं में अतिक्रमण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। परियोजनाओं में देरी, लागत वृद्धि और सार्वजनिक धन पर अतिरिक्त बोझ का एक बड़ा कारण अतिक्रमण भी है।उन्होंने कहा कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है। रेलवे और एमआरवीसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया है, वहां दोबारा कब्जा न हो। इसके लिए नियमित निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
गलगली ने यह भी मांग की कि सभी रेल परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण, पुनर्वास तथा अतिक्रमण हटाने की प्रगति से संबंधित जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़े और नागरिकों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि मुंबई में तेजी से विकसित हो रहे रेल नेटवर्क के लिए भूमि की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य की अनेक सार्वजनिक परिवहन परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए सरकार, रेलवे और स्थानीय प्रशासन को समन्वय बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए।


