मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह रसातल में पहुंच चुकी है और निचले स्तर से लेकर मंत्रालय की छठी मंजिल तक हफ्ते पहुंचाए जा रहे हैं। हफ्ता वसूली के कारण पुलिस प्रशासन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। इसी वजह से राज्य में खुलेआम ड्रग्स का काला कारोबार चल रहा है, गांजा बेचा जा रहा है तथा हाथभट्टियों और जहरीली शराब का तांडव मचा हुआ है। इन्हीं अवैध धंधों के कारण पुणे में जहरीली शराब पीने से 22 निर्दोष लोगों की जान चली गई। राज्य का गृह विभाग ‘पांडू हवलदार’ चला रहा है, इसलिए हर तरफ अराजकता फैली हुई है। यह आरोप कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने लगाया है।


हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को इसका प्रायश्चित करना चाहिए और राज्य को एक पूर्णकालिक तथा सक्षम गृहमंत्री देना चाहिए।तिलक भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि पुणे में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के बाद सरकार को होश आया है और अब हाथभट्टियों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। ये हाथभट्टियां एक रात में खड़ी नहीं हुई हैं। राज्य में 500 शहर और 43 हजार गांव हैं, जहां अवैध धंधे और हाथभट्टियां खुलेआम चल रही हैं।


गुजरात से महाराष्ट्र में आने वाले ड्रग्स, जामताड़ा जैसे साइबर अपराध और अन्य अवैध कारोबारों के रैकेट खुलेआम चल रहे हैं तथा इन्हें गृह विभाग का संरक्षण प्राप्त है। गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस का आदर्श वाक्य ‘सदरक्षणाय खलनिग्रहणाय’ ही बदल दिया है। पुणे की घटना पर हर स्तर से आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है, इसलिए अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अब कार्रवाई का नाटक किया जा रहा है।
■ चोर को छोड़कर साधु को फांसी
गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि बुलढाणा जिले में एक लड़की लापता हो गई थी। बाद में पुलिस को एक शव मिला और उसे उसी लड़की का शव मान लिया गया। इसके बाद पुलिस ने लड़की के पिता और भाई को गिरफ्तार कर उनकी बेरहमी से पिटाई की, उनसे कबूलनामा लिया और यह दावा किया कि उन्होंने 48 घंटे में मामले का खुलासा कर दिया है। लेकिन बाद में वह लापता लड़की जीवित सामने आ गई। पुलिस ने बिना किसी जांच-पड़ताल के यह पूरा मामला संभाला। यह घटना ‘चोर को छोड़कर साधु को फांसी’ देने जैसी है। महाराष्ट्र में पुलिस विभाग का कामकाज इसी तरह चल रहा है, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
■ मनोज जरांगे पाटील के अनशन पर
मराठा समाज को आरक्षण देने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील द्वारा शुरू किए गए अनशन पर बोलते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि मराठा आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नवी मुंबई के वाशी में आधी रात को मनोज जरांगे पाटील को आरक्षण देने की घोषणा की थी और गुलाल उड़ाया था। इसके बाद आजाद मैदान में हुए आंदोलन के समय भी गुलाल उड़ाया गया था, उस समय देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे। इन दोनों आंदोलनों के दौरान मुख्यमंत्रियों ने कौन-कौन से आश्वासन दिए थे, उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। यदि आरक्षण का प्रश्न हल करना है तो जातिवार जनगणना कराई जानी चाहिए। इससे मराठा समाज सहित सभी समाजों के आरक्षण का प्रश्न सुलझ सकता है, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


