मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़की बहिन योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद करीब 80 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया गया है। यह जानकारी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सोमवार को दी।


एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में फडणवीस ने बताया कि विभिन्न सरकारी डाटाबेस के जरिए दस्तावेजों की जांच करने पर कई ऐसे लोग लाभ ले रहे थे जो योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे। जांच में 14 हजार पुरुष, लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता और 4 से 5 लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके परिवार के पास वाहन मौजूद थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना शुरू करते समय सरकार ने पात्रता के लिए कुछ मानदंड तय किए थे, लेकिन लाभार्थियों को स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) के आधार पर आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। बाद में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India) ने इस पर सवाल उठाया कि लाभार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया।
सीएजी की आपत्तियों के बाद राज्य सरकार ने सभी लाभार्थियों से केवाईसी (Know Your Customer) प्रक्रिया पूरी करने को कहा। इसके बाद दस्तावेजों की जांच में बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों की पहचान हुई और उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया।
केवाईसी एक अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया है, जिसका उपयोग वित्तीय संस्थान और अन्य संगठन अपने ग्राहकों की पहचान की पुष्टि करने तथा संभावित जोखिमों का आकलन करने के लिए करते हैं। इससे फर्जी खातों, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलती है।
सरकार का कहना है कि पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी सत्यापन प्रक्रिया जारी रहेगी।


