मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप-2026’ को फिलहाल स्थगित किए जाने के निर्णय का महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने स्वागत किया है। महासंघ ने इसे मंदिर ट्रस्टियों और हिंदू संगठनों के संगठित प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है।


महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठनकर्ता सुनील घनवट ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस मुद्दे पर राज्यभर में आयोजित बैठकों, पत्रकार वार्ताओं और देवस्थान भूमि संरक्षण परिषदों के माध्यम से सरकार के समक्ष मंदिरों का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा गया। उन्होंने इस सफलता का श्रेय महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, अष्टविनायक मंदिर समिति, विश्व हिंदू परिषद और राज्यभर के मंदिर ट्रस्टियों के संयुक्त संघर्ष को दिया।
घनवट ने कहा कि राजस्व मंत्री द्वारा देवस्थान की इनामी भूमि मंदिरों को वापस दिलाने, वक्फ बोर्ड की तर्ज पर अतिक्रमण हटाने, कानूनी सहायता के लिए विशेषज्ञ वकीलों की सलाह लेने तथा लंबे समय से कब्जे में रही भूमि के मामलों में मंदिरों को समान मूल्य का भूखंड देने जैसे प्रस्ताव स्वागत योग्य हैं।
उन्होंने 15 अगस्त तक सुनवाई प्रक्रिया के लिए गठित की जाने वाली अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की 15 सदस्यीय समिति में देवस्थान प्रतिनिधियों को शामिल करने के निर्णय का भी स्वागत किया।
हालांकि, मंदिर महासंघ ने मांग की है कि नए कानून में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को भी शामिल किया जाए। महासंघ का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों को दी जाने वाली निधि का उपयोग केवल हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार, मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक आवश्यकताओं के लिए ही किया जाए तथा इसे किसी भी गैर-धार्मिक या सरकारी योजनाओं पर खर्च न किया जाए।
इसके अलावा महासंघ ने बड़े मंदिरों की आय का उपयोग छोटे और उपेक्षित मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए करने तथा गांवों में सेवा देने वाले गुरव, पुजारी, पुरोहित और अन्य सेवादारों के लिए प्रति माह 10 हजार से 15 हजार रुपये तक मानदेय शुरू करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी है।
सुनील घनवट ने कहा कि मंदिरों के हितों की समग्र सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन प्रस्तावों को नई प्रक्रिया और कानून का हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है।


