2014 के सर्वेक्षण के आधार पर ही जारी हों क्यूआर कोड कार्ड, विधायक संजय उपाध्याय ने मनपा आयुक्त को लिखा पत्र।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

बोरिवली के विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप फेरीवालों को क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सत्यापन आधारित बनाने की मांग करते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत पत्र भेजा है।


अपने पत्र में विधायक संजय उपाध्याय ने कहा है कि 6 मई 2026 को मुंबई उच्च न्यायालय ने शहर के सर्वेक्षित 99,435 हॉकर्स को क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट पहचान पत्र वितरित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि इस प्रक्रिया का लाभ केवल पात्र फेरीवालों को ही मिले और भविष्य में अवैध अथवा नए हॉकर्स को इसका फायदा न उठाने दिया जाए।


उन्होंने विशेष रूप से आर/मध्य मनपा विभाग का उल्लेख करते हुए कहा कि 4 अगस्त 2014 को हुए महानगरपालिका सर्वेक्षण में 5,027 हॉकर्स का पंजीकरण किया गया था। इसलिए क्यूआर कोड कार्ड जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित व्यक्ति का नाम 2014 के मूल सर्वेक्षण में शामिल था या नहीं।


विधायक उपाध्याय ने प्रत्येक फेरीवाले से वर्ष 2014 अथवा उससे पूर्व के राशन कार्ड, अधिवास प्रमाणपत्र, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज लेकर उनकी गहन जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल आवेदन या स्वयं घोषणा के आधार पर किसी को भी पहचान पत्र जारी नहीं किया जाना चाहिए। जिन लोगों का नाम 2014 के अधिकृत सर्वेक्षण में नहीं है या जिनके दस्तावेज संदिग्ध अथवा अपूर्ण हैं, उन्हें किसी भी परिस्थिति में क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र नहीं दिया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का उद्देश्य कानूनी संरक्षण प्राप्त सर्वेक्षित हॉकर्स की पहचान सुनिश्चित करना है, न कि नए अथवा अवैध फेरीवालों को मान्यता प्रदान करना। इसलिए महानगरपालिका को इस पूरी प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।


संजय उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र वितरण पूरा होने के बाद बोरिवली विधानसभा क्षेत्र के सभी लाभार्थी हॉकर्स की सूची उनके कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। इस सूची में प्रत्येक फेरीवाले का पूरा नाम, मोबाइल नंबर, सर्वेक्षण क्रमांक, व्यवसाय का अधिकृत स्थान, संबंधित विभाग और क्यूआर कोड नंबर का उल्लेख किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गलत प्रविष्टि की जांच करना आसान हो सके।


उन्होंने आग्रह किया कि क्यूआर कोड वितरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें विश्वास में लेकर समस्त जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए। इस पत्र की प्रतियां महाराष्ट्र सरकार के मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार, महापौर ऋतु तावड़े, पूर्व सांसद किरीट सोमैया सहित विभिन्न जिम्मेदार और संबंधित कार्यालयों को भी भेजी गई हैं।

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