सुप्रिया सुळे का केंद्र सरकार पर हमला, बोलीं- शिक्षा के जरिए नई पीढ़ी पर विचारधारा थोपने की कोशिश।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद Supriya Sule ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से अपनी विचारधारा नई पीढ़ी पर थोपने का आरोप लगाया है। पुणे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव देश के युवाओं के भविष्य और स्वतंत्र सोच के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।


सुप्रिया सुळे ने कहा कि कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा एनसीईआरटी का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका आरोप है कि सत्ता पक्ष शिक्षा के माध्यम से अपनी वैचारिक सोच विद्यार्थियों पर थोपने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें नई पीढ़ी के स्वतंत्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकती हैं।


इंडिया गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी प्रमुख नेता लगातार संपर्क में रहते हैं। संसद सत्र के दौरान सभी दलों के नेता नियमित रूप से बैठकों में शामिल होते हैं और विभिन्न विधेयकों तथा मुद्दों पर संयुक्त रणनीति तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि संसद में कौन किस विषय पर बोलेगा और किन विधेयकों पर चर्चा की जाएगी, इस पर भी सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाता है।


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के नेता धर्मरावबाबा आत्राम द्वारा शरद पवार गुट के पांच सांसदों के दूसरी पार्टी में जाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुळे ने कहा कि यदि उनके पास ऐसी कोई जानकारी है तो वे संबंधित सांसदों के नाम सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है और यदि कोई जानकारी है तो उस पर खुलकर चर्चा की जा सकती है।


सुप्रिया सुळे ने देश की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार दलों और नेताओं को तोड़ने की राजनीति से लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उनका कहना था कि चुनाव में अभी काफी समय बाकी है, फिर भी राजनीतिक दलों को तोड़ने की जल्दबाजी समझ से परे है।


उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सशक्त विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विपक्ष ने हमेशा रचनात्मक सहयोग दिया है। जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण कानून को भी व्यापक सहमति से पारित किया गया था। ऐसे में किसी विधेयक को पारित कराने या राजनीतिक लाभ के लिए दलों को तोड़ने की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।


सुळे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सभी नेता सत्ता पक्ष में चले जाएंगे तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी स्थिति बन रही है जहां विपक्ष के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। महाविकास आघाड़ी की बैठकों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जल्द ही इस विषय पर विस्तृत जानकारी मीडिया के सामने रखेंगे।

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