मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य सरकार और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मुंबई अब भी टीबी के गंभीर संकट से जूझ रही है। पिछले तीन वर्षों (2023-2025) में शहर में 1 लाख 33 हजार 410 टीबी मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें मालाड, दादर, अंधेरी पश्चिम, गोवंडी और घाटकोपर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 48,280, 2024 में 46,784 और 2025 में 38,346 टीबी मरीज सामने आए। इनमें फेफड़ों की टीबी (पल्मोनरी) और फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी (एक्स्ट्रा पल्मोनरी) दोनों के मरीज शामिल हैं। हालांकि 2025 में मामलों में कुछ कमी दर्ज हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी का खतरा अभी भी गंभीर बना हुआ है।


वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक मालाड में सबसे अधिक 9,833 मरीज, दादर में 9,017, अंधेरी पश्चिम में 8,087, गोवंडी में 7,273 और घाटकोपर में 7,096 टीबी मरीज दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई की घनी आबादी, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, कुपोषण, मधुमेह और बढ़ता वायु प्रदूषण टीबी के प्रसार के प्रमुख कारण हैं।
■ महाराष्ट्र में भी बढ़ा टीबी का बोझ
मुंबई के साथ-साथ पूरे महाराष्ट्र में भी टीबी के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 6 लाख 12 हजार 317 टीबी मरीज दर्ज किए गए हैं। यानी हर वर्ष औसतन 2 लाख से अधिक नए मरीज सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘टीबी मुक्त महाराष्ट्र’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक जनजागरूकता, समय पर जांच और प्रभावी उपचार व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
■ लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार वजन कम होना, बुखार, रात में अत्यधिक पसीना आना या लगातार थकान महसूस हो रही हो, तो तुरंत टीबी की जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और पूरा उपचार लेने से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।


