मुंबई वार्ता संवाददाता

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को लगातार लग रहे राजनीतिक झटकों के बीच सोमवार को विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने भी पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया। इससे पहले पिछले सप्ताह पार्टी के छह सांसद भी साथ छोड़ चुके हैं। इन घटनाओं के बाद ठाकरे गुट ने नुकसान की भरपाई और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से वरली में पदाधिकारियों की आपात बैठक बुलाई।


बैठक में सभी विभाग प्रमुख, शाखा प्रमुख और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर और विधायक सुनील शिंदे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर संगठन को एकजुट रहने का संदेश दिया।
किशोरी पेडणेकर ने कहा कि आज भी पार्टी में सच्चे शिवसैनिक मौजूद हैं, जिन्होंने शाखा स्तर से संगठन को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कई नेताओं को सम्मान और अवसर दिए, लेकिन कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में एकजुट रहें और पार्टी के अंदर की बात बाहर न ले जाएं। पेडणेकर ने सचिन अहीर का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें भाई जैसा स्नेह दिया गया, लेकिन उनके इस फैसले से कार्यकर्ताओं को निराशा हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब संगठन को और मजबूती से एकजुट होने की जरूरत है।


वहीं विधायक सुनील शिंदे ने कहा कि कुछ नेता पार्टी छोड़कर चले गए, लेकिन असली ताकत आज भी शिवसैनिकों के साथ है। उन्होंने बताया कि यह बैठक कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने के लिए आयोजित की गई है और इसी कारण आदित्य ठाकरे को बैठक में नहीं बुलाया गया, क्योंकि उनके पास अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
सुनील शिंदे ने कहा कि वरली बालासाहेब ठाकरे की कर्मभूमि रही है और यहां आज भी आक्रामक तथा समर्पित शिवसैनिक मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने संगठन में भ्रम और गुटबाजी फैलाने का काम किया, लेकिन अब कार्यकर्ता पूरी मजबूती से पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि कोई शिवसैनिकों को डराने या दबाव बनाने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
सचिन अहीर के पार्टी छोड़ने के बाद आयोजित इस बैठक को ठाकरे गुट के लिए संगठनात्मक एकजुटता दिखाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की महत्वपूर्ण कवायद माना जा रहा है।


