मुंबई वार्ता संवाददाता

श्रीटीलाद्वारा गाद्याचार्य मंगल पीठाधीश्वर श्री माधवाचार्य जी महाराज ने रविवार को मालाड में हुए संत मिलन कार्यक्रम में कहा कि देश में संतों, मंदिरों और सनातन संस्कृति की रक्षा सुनिश्चित होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि संतों, धर्माचार्यों और मंदिरों को हमेशा स्वतंत्र रहना चाहिए। उन पर पर कोई भी राजनीतिक प्रभाव नहीं होनी चाहिए।


रामानंद संप्रदाय के सबसे बड़े बैरागी अखाड़े डाकोर-इंदौर खालसा के पीठाधीश्वर माधवाचार्य जी महाराज ने कहा कि आस्था और श्रद्धा हमारी जीवन पद्धति का आधार है और यही सनातन भारतीय संस्कृति की आत्मा है। रविवार को जगद्गुरू रामानंदाचार्य (दक्षिण पीठ) के प्रमुख श्री स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने मालाड, मुंबई के सुप्रसिद्ध श्री संकट मोचन विजय हनुमान टेकड़ी मंदिर व संत आश्रम में श्रीटीलाद्वारा गाद्याचार्य मंगल पीठाधीश्वर श्री माधवाचार्य जी महाराज से विशेष मुलाकात की। संतों ने नासिक में होने वाले आगामी कुंभ मेले में संतो के अखाड़ों और धर्माचार्यों के मान-सम्मान और उनके व्यवस्थित समन्वय को लेकर भी आपसी विमर्श किया।


नासिक तीर्थ क्षेत्र से पधारे महंत भक्तिदास, दहिसर के महंत काशीदास महाराज, धर्मसेवी वीरेंद्र मिश्र, शैलेंद्र श्रीवास्तव व अन्य प्रमुखता से उपस्थित थे। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी नरेंद्राचार्य महाराज ने तपोवन परिसर के विशाल हनुमान मंदिर, राम जानकी मंदिर का दर्शन-पूजन भी किया। श्री श्री 1008 माधवाचार्य जी महाराज ने रामानंदाचार्य को माला पहना कर अभिवादन किया। इस अवसर पर हुए भंडारे प्रसाद का अनेक लोगों ने लाभ उठाया।


