मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की हजारों सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को बड़ी राहत देते हुए लीज एग्रीमेंट के पंजीकरण पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी में भारी कटौती की है। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि आवासीय (रेजिडेंशियल) संपत्तियों के लिए स्टाम्प ड्यूटी अधिकतम 0.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक (कमर्शियल) संपत्तियों के लिए अधिकतम 1.5 प्रतिशत होगी। पहले यह शुल्क लीज की शर्तों, प्रीमियम और अन्य कारकों के आधार पर 5 प्रतिशत तक पहुंच जाता था।


यह निर्णय विशेष रूप से उन सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के लिए राहत लेकर आया है, जो 99 वर्ष की लीज पर सरकारी या अन्य संस्थाओं की जमीन पर बनी हैं और वर्षों से अधिक स्टाम्प ड्यूटी तथा जटिल प्रक्रियाओं के कारण अपने लीज एग्रीमेंट का पंजीकरण नहीं करा पा रही थीं।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह रियायत लीजहोल्ड भूमि पर बनी आवासीय सहकारी हाउसिंग सोसायटियों पर लागू होगी। इसका लाभ पुरानी सोसायटियों को अपने दस्तावेज नियमित कराने के साथ-साथ नई सोसायटियों को भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में मिलेगा। यह नई दरें मुंबई शहर और उपनगरों में समान रूप से लागू होंगी।
■ करोड़ों रुपये की होगी बचत
राजस्व मंत्री बावनकुले ने विधानसभा में बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई सोसायटियों की स्टाम्प ड्यूटी में भारी कमी आएगी।
मित्तल चैंबर्स ओनर्स को-ऑपरेटिव सोसायटी की स्टाम्प ड्यूटी लगभग ₹101.21 करोड़ से घटकर ₹10.68 लाख रह जाएगी।
न्यू मेकर चैंबर्स की देनदारी ₹119.47 करोड़ से घटकर ₹1.76 करोड़ होगी।
सी लॉट को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, कोलाबा की स्टाम्प ड्यूटी ₹176.82 करोड़ के बजाय केवल ₹27.05 लाख होगी।
अभिलाषा प्रिमाइसेस सोसायटी, कोलाबा को अब ₹104.83 करोड़ की जगह करीब ₹19.45 लाख स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी।
क्या होती है लीजहोल्ड जमीन?
लीजहोल्ड व्यवस्था में फ्लैट का स्वामित्व खरीदार के पास होता है, लेकिन जमीन का मालिकाना हक लीज देने वाली संस्था के पास रहता है। ऐसे मामलों में सहकारी हाउसिंग सोसायटी को जमीन का पूर्ण स्वामित्व नहीं मिलता।
मुंबई में लीजहोल्ड जमीन का नियंत्रण मुख्य रूप से म्हाडा (MHADA), सिडको (CIDCO), एमएमआरडीए (MMRDA) जैसी सरकारी एजेंसियों या कुछ निजी ट्रस्टों के पास होता है।
क्या होती है फ्रीहोल्ड जमीन?
फ्रीहोल्ड व्यवस्था में डेवलपर जमीन का स्थायी स्वामित्व हाउसिंग सोसायटी को हस्तांतरित कर देता है। कन्वेयंस डीड सोसायटी के नाम पर होने के कारण जमीन पर उसका पूर्ण मालिकाना अधिकार होता है।
पुनर्विकास परियोजनाओं को मिलेगा फायदा
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मुंबई में पुराने भवनों के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई परियोजनाओं में पुनर्विकास शुरू करने से पहले लीज एग्रीमेंट का पंजीकरण या नवीनीकरण आवश्यक होता है। स्टाम्प ड्यूटी में कमी से सोसायटियों और डेवलपर्स पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा, जिससे पुनर्विकास परियोजनाएं अधिक व्यवहारिक और तेज़ी से आगे बढ़ सकेंगी।


