मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने वालों को धमकी देना लोकतंत्र के खिलाफ है और यह मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा, “फडणवीस मतलब महाराष्ट्र नहीं हैं। जनता के पैसे का हिसाब जनता जरूर पूछेगी।”


मीडिया से बातचीत में सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार के कथित भ्रष्टाचार और मिसिंग लिंक परियोजना में अनियमितताओं को उजागर करने के बाद मुख्यमंत्री की भाषा और अधिक आक्रामक हो गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित शब्द और “देख लूंगा” जैसी चेतावनी लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।


सपकाल ने कहा कि सरकार जनता के पैसे से विकास कार्य करती है, इसलिए उन कार्यों पर सवाल उठाना विपक्ष और नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि मिसिंग लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को बेनकाब किया है, इसलिए मुख्यमंत्री असहज हैं।
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उन्हें नार्को टेस्ट कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शी है तो विभिन्न परियोजनाओं, समृद्धि महामार्ग, मिसिंग लिंक और मुंबई की जमीनों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
■ ‘कर्जमाफी की घोषणा सिर्फ दिखावा’
हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य सरकार की किसान कर्जमाफी की घोषणा को भी “फर्जी और भ्रामक” करार दिया। उनका आरोप है कि सरकार ने कर्जमाफी की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक किसानों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राज्यभर में आंदोलन कर रहे हैं।
सपकाल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसानों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाती है, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई ठोस चर्चा नहीं करती। उन्होंने भाजपा-महायुति सरकार को “किसान विरोधी” बताते हुए किसानों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।


