मुंबई वार्ता संवाददाता

वैश्विक पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index-EPI) 2026 में भारत 177 देशों में 176वें स्थान पर रहा है। यह रिपोर्ट येल विश्वविद्यालय और उसके सहयोगी संस्थानों द्वारा जारी की गई है, जिसमें देशों का मूल्यांकन पर्यावरण स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कुल 47 मानकों के आधार पर किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार भारत को वायु गुणवत्ता, जैव विविधता संरक्षण, वन क्षेत्र की सुरक्षा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जैसे क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन के कारण निचले पायदान पर रखा गया है। भारत इस सूची में केवल लाओस से ऊपर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप के कई देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। एस्टोनिया इस सूचकांक में पहले स्थान पर है, जबकि लक्ज़मबर्ग और यूनाइटेड किंगडम क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को वायु प्रदूषण कम करने, जैव विविधता की रक्षा, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरणीय नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। हालांकि भारत सरकार पहले भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है और उनका कहना रहा है कि कई आकलन भारतीय परिस्थितियों और विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करते।


