मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

विलेपार्ले (पूर्व) के कोलडोंगरी स्थित पटेल चॉल नंबर में बुधवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब कथित तौर पर SRA (स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण) के अधिकारी पुलिस सुरक्षा के साथ झोपड़ियां तोड़ने पहुंच गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुनर्विकास परियोजना से जुड़े बिल्डर एमकेएस बिल्डर्स और उसके प्रतिनिधि सौरभ देसाई के दबाव में यह कार्रवाई की जा रही थी, जबकि प्रभावित परिवारों को निर्धारित किराया (भाड़ा) तक नहीं दिया गया है।


रहवासियों का कहना है कि एक ओर उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था और किराया नहीं मिला, वहीं दूसरी ओर बरसात के मौसम में उनके सिर से छत छीनने की कोशिश की गई। इससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में लोग विरोध में उतर आए।


स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि SRA अधिकारियों ने मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर बिल्डर के हित में कार्रवाई करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि बरसात के बीच गरीब परिवारों को बेघर करने की यह कोशिश पूरी तरह अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।
मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय विधायक पराग अलवाणी मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर तत्काल तोड़क कार्रवाई रुकवाई और प्रभावित रहवासियों की शिकायतें सुनीं। विधायक के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिली।
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय पूरे मामले में अप्रत्यक्ष रूप से बिल्डर का साथ दिया। लोगों का कहना है कि पुलिस ने अन्य जरूरी काम छोड़कर बड़ी संख्या में बल तैनात किया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रशासन गरीबों की सुरक्षा के बजाय बिल्डर के हितों की रक्षा में लगा हुआ है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जब तक सभी पात्र परिवारों को नियमानुसार किराया, वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्विकास से जुड़े सभी अधिकार नहीं दिए जाते, तब तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
(नोट: यह खबर स्थानीय रहवासियों द्वारा लगाए गए आरोपों और घटनास्थल पर सामने आई जानकारी पर आधारित है। SRA, बिल्डर और पुलिस प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)


