श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई की पुरानी और जर्जर इमारतों के पुनर्विकास को लेकर आयोजित एक मार्गदर्शन सभा में वक्ताओं ने कहा कि हालिया न्यायिक फैसले और सरकार की नीति से वर्षों से अटकी पुनर्विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। सभा में नेशनल वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से पुराने भवनों के पुनर्विकास की नई उम्मीद जगी है और इससे हजारों परिवारों को सुरक्षित आवास मिलने का रास्ता साफ होगा।


सभा में भाजपा विधायक कालिदास कोलंबकर, शिवसेना विधायक मनीषा कायंदे, आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गवई, भाजपा के पूर्व विधायक एवं म्हाडा के पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र मिश्रा, एडवोकेट दुष्यंत कुमार, विनोद तलरेजा, राजेश देढ़िया, प्रकाश जगताब तथा समाजसेवी राजेंद्र मेहता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। करीब पांच घंटे तक चले कार्यक्रम में भाड़ेकरुओं को पुनर्विकास से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी दी गई तथा उनके सवालों के जवाब भी दिए गए।


विधायक कालिदास कोलंबकर ने कहा कि वर्षों से रुकी पुनर्विकास परियोजनाओं को अब गति मिलेगी और खतरनाक इमारतों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित घर मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
विधायक मनीषा कायंदे ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर इमारतों को बार-बार समय देना उचित नहीं है। पुनर्विकास समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए और कुछ लोगों की आपत्तियों के कारण अधिकांश निवासियों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।
डॉ. राजेंद्र गवई ने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक लाभ दक्षिण और मध्य मुंबई के गिरगांव, भुलेश्वर, मस्जिद, परेल, लालबाग, दादर, ग्रांट रोड, ताड़देव, कालबादेवी, डोंगरी, नागपाड़ा, भायखला और चिरा बाजार जैसे क्षेत्रों की पुरानी सेस (Cess) इमारतों को मिलेगा, जहां हजारों परिवार लंबे समय से पुनर्विकास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
संस्था के ट्रस्टी राजेंद्र मेहता ने बताया कि कई सेस इमारतें 70 से 80 वर्ष से अधिक पुरानी हैं और सरकार ने अनेक भवनों को खतरनाक घोषित किया है। उन्होंने कहा कि एक हजार से अधिक इमारतें अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं, जहां इमारत गिरने का खतरा बना रहता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस फैसले से कानूनी अड़चनें कम होंगी और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विकास कार्यों में तेजी आएगी। वहीं एडवोकेट दुष्यंत कुमार ने दावा किया कि मुंबई की 13 हजार से अधिक सेस इमारतों और लगभग दो लाख निवासियों को इसका लाभ मिलेगा।
एडवोकेट विनोद तलरेजा ने कहा कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को नई गति मिलेगी, जबकि एडवोकेट राजेश देढ़िया ने इसे दक्षिण और मध्य मुंबई के शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के अंत में बाबूभाई भवानजी ने भाड़ेकरुओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि मकान मालिकों की मनमानी का मुकाबला संगठन के बल पर ही किया जा सकता है और सरकार भी भाड़ेकरुओं के हित में काम कर रही है।
सभा के दौरान पुनर्विकास संबंधी मार्गदर्शन और सहायता के लिए दादर (पूर्व) स्थित आरजू संस्था के कार्यालय में प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक संपर्क करने की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन राजेंद्र पालव, मिलन सारंग, शिरीष परब, महेश सुर्वे और परवीन सावंत ने किया।


