मुंबई वार्ता संवाददाता

कॉंग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में रोजगार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के हर वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा पूरा नहीं हुआ और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘पीएम-वीबीआरवाई (PM-VBRY)’ जैसी योजनाएं रोजगार सृजन के मामले में विफल साबित हुई हैं।


लोकसभा में प्रश्न उठाते हुए वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सत्ता में आने से पहले हर साल दो करोड़ नए रोजगार देने का वादा किया था। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में लगभग 24 करोड़ युवाओं को स्थायी रोजगार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर लगातार लगभग 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी 12.1 प्रतिशत से घटकर 11.4 प्रतिशत रह गई, जबकि कृषि क्षेत्र में यह 44.1 प्रतिशत से बढ़कर 46.1 प्रतिशत हो गई। उनका आरोप था कि उद्योगों में रोजगार नहीं मिलने के कारण युवाओं को फिर से कृषि क्षेत्र की ओर लौटना पड़ रहा है।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएम-वीबीआरवाई’ के तहत लाखों रोजगार देने के दावे कर रही है, लेकिन उत्पादन क्षेत्र में गिरावट को देखते हुए इन योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रोत्साहन राशि वास्तव में रोजगार सृजन सुनिश्चित कर पाएगी।
वर्षा गायकवाड़ ने रोजगार की गुणवत्ता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के वेतनभोगी कर्मचारियों में लगभग 40 प्रतिशत के पास लिखित रोजगार अनुबंध तक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आधे से अधिक कर्मचारियों को सवेतन अवकाश, भविष्य निधि (पीएफ) और स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या पीएम-वीबीआरवाई के तहत पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को इन मूलभूत अधिकारों की गारंटी दी जाएगी या उन्हें भी संविदा व्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में बड़ी संख्या में स्नातक युवा या तो बेरोजगार हैं या अपनी योग्यता से कम स्तर की नौकरियां करने को मजबूर हैं। वर्षा गायकवाड़ ने सरकार से सवाल किया कि क्या उसकी नई रोजगार योजनाएं ठोस और समयबद्ध रणनीति पर आधारित हैं या फिर यह भी केवल चुनावी घोषणा बनकर रह जाएंगी।


