मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR के माध्यम से राज्य में 3 करोड़ 28 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। सपकाल ने संदिग्ध मतदाताओं की सूची विधानसभा क्षेत्र और बूथवार सार्वजनिक करने तथा दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा तीन महीने बढ़ाने की मांग की।


सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर SIR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य एवं पूर्व मंत्री नसीम खान, विधायक अमीन पटेल, विधायक भाई जगताप, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजेश शर्मा, प्रदेश महासचिव एडवोकेट संदेश कोंडविलकर और अभिजीत सपकाळ सहित अन्य नेता मौजूद थे।


चुनाव अधिकारियों से मुलाकात के बाद सपकाळ ने कहा कि महाराष्ट्र में पहले 9 करोड़ 78 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता थे। SIR के बाद 31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची में 7 करोड़ 71 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं। यानी प्रारूप सूची में पिछले आंकड़े की तुलना में करीब 2.07 करोड़ की कमी दिखाई देती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां या मैपिंग से जुड़ी समस्या चिन्हित की गई है।
सपकाल ने हालांकि दावा किया कि कुल 3.28 करोड़ नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन मतदाताओं के नाम किस कारण से हटाए या चिन्हित किए गए हैं।
■ 1.22 करोड़ मतदाताओं को नोटिस की प्रक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार SIR के तहत 1,22,24,007 मतदाता नोटिस श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इनमें 62,48,281 मतदाता ऐसे हैं जिनका रिकॉर्ड पुराने रिकॉर्ड से मैप नहीं हो पाया, जबकि 59,75,726 रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं।
सपकाल ने मांग की कि इन सभी संदिग्ध अथवा चिन्हित मतदाताओं का डेटा निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर विधानसभा क्षेत्र और बूथ के अनुसार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में यह जानकारी पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।
वहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 की प्रारूप मतदाता सूची, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया, नाम खोजने की सुविधा तथा ASDD यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराई गई है।
■ दावे-आपत्तियों की समयसीमा तीन महीने बढ़ाने की मांग
सपकाल ने कहा कि 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय पर्याप्त नहीं है। गणेशोत्सव सहित विभिन्न त्योहारों के बीच यह प्रक्रिया चल रही है, इसलिए उन्होंने समयसीमा तीन महीने बढ़ाने की मांग की। उनके अनुसार प्रतिनिधिमंडल को इस मांग पर चुनाव आयोग की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
सपकाल ने भाजपा और महायुति सरकार पर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के माध्यम से विपक्ष को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची की जांच, अद्यतन और विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया के रूप में संचालित कर रहा है।
दुष्काल घोषित कर किसानों को एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर देने की मांग
सपकाळ ने राज्य में कथित गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को सर्वेक्षण में समय गंवाने के बजाय तत्काल सूखा घोषित करना चाहिए। उन्होंने किसानों को एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता देने और केंद्र सरकार से अतिरिक्त मदद लेने की मांग की। यह मांग उन्होंने हाल के दिनों में भी सार्वजनिक रूप से उठाई है।
उन्होंने शक्तिपीठ महामार्ग के लिए प्रस्तावित निधि का इस्तेमाल किसानों को राहत देने के लिए करने की मांग भी की।
■ भाजपा पर ‘ब्लैकमेलिंग’ का आरोप
पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर सपकाळ ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी नेताओं को दबाव और धमकी के जरिए अपने साथ लेने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे केवल किसी एक नेता का मामला नहीं मानती और ऐसी राजनीतिक प्रवृत्ति का विरोध किया जाना चाहिए। ये सपकाळ द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
■ आईआईटी बॉम्बे छात्र मामले पर भी बोले सपकाल
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का उल्लेख करते हुए सपकाळ ने कहा कि कांग्रेस परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि संस्थान में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं और साहिल के मामले में पुलिस ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया है। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद समस्याओं पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण की मांग की।


