श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं मुंबई के पूर्व उपमहापौर राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य के बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। 18 जुलाई 2026 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (MSEDCL) की वित्तीय स्थिति, बढ़ते घाटे, महंगी बिजली और वितरण व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं।


■ पत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
● MSEDCL का भारी वित्तीय घाटा
31 मार्च 2025 तक MSEDCL का कुल वित्तीय घाटा 35,671 करोड़ रुपये था, जो देश में सातवां सबसे बड़ा घाटा बताया गया है।


■ बढ़ता कर्ज
कंपनी पर कुल 90,659 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से लगभग 36,000 करोड़ रुपये (करीब 40%) ऐसा है जिसे केवल बिजली दरों से चुकाना संभव नहीं है।
■ देश में खराब रैंकिंग
MSEDCL को बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की राष्ट्रीय रैंकिंग में 54 में 49वां तथा उपभोक्ता सेवा रैंकिंग में 66 में 47वां स्थान मिला है।
■ बिजली वितरण में अधिक नुकसान
वित्तीय वर्ष 2024-25 में वितरण हानि 15.06% रही, जबकि नियामक द्वारा तय लक्ष्य 11.96% है।
■ कृषि क्षेत्र में बिना मीटर वाले कनेक्शन
महाराष्ट्र में 56% कृषि उपभोक्ता बिना मीटर के हैं, जिसके कारण वास्तविक वितरण हानि 5-6% अधिक होने की बात MERC ने कही है।
■ महंगी बिजली
राज्य में घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरें देश में सबसे अधिक दरों में शामिल हैं।
■ लागत वसूली में कमी
वर्ष 2024-25 में प्रति यूनिट 0.37 रुपये का नकद घाटा रहा, जिससे लगभग 6,000 करोड़ रुपये की कमी आई।
■ बिजली खरीद की ऊंची लागत
महाराष्ट्र में बिजली खरीद की औसत लागत 5.73 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.40 रुपये प्रति यूनिट है।
हाल में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की टैरिफ वृद्धि से कंपनी पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है।
■ थर्मल बिजली पर अधिक निर्भरता
वर्तमान में कुल बिजली खरीद का 52% हिस्सा थर्मल पावर से आता है, जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार यह अनुपात कम होना चाहिए।
■ महाराष्ट्र को संभावित बचत
राजेश शर्मा ने पत्र में दावा किया है कि यदि सुधार लागू किए जाएं तो अगले 10 वर्षों में राज्य को बड़ी वित्तीय बचत हो सकती है—
44,000 करोड़ रुपये की बचत AT&C (तकनीकी एवं वाणिज्यिक) नुकसान को 9% तक लाने से।
50,000 करोड़ रुपये की बचत नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाने और महंगी थर्मल बिजली पर निर्भरता कम करने से।
38,000 करोड़ रुपये की बचत बिजली आपूर्ति लागत कम होने से सब्सिडी आवश्यकता घटने पर।
■ सरकार से की यह अपील
राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति सुधारने, उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम करने और MSEDCL को अधिक सक्षम एवं भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु जल्द से जल्द आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जाएं। उन्होंने कहा कि समय रहते सुधार लागू करने से महाराष्ट्र की बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकती है।


